बाकायदा तफ्तीश और पूछताछ की जानी चाहिए। किंतु 22 दिन में अपराध संहिता का पालन न करके प्रशासनिक कार्रवाई का मुंह ताका गया। जो सरासर विधि सम्मत नहीं है। शिव प्रसाद गुप्त अस्पताल के चिकित्सकों ने जो जांच रिपोर्ट बनाई है। उसे जनहित में सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
कोविड से दिवंगत हुए मरीज के परिजनों को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि किन मानकों के आधार पर अस्पताल प्रबंधन ने इलाज में कितना खर्च किया। कितनी धनराशि से उन मानकों पर इलाज पर खर्च होना चाहिए था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लगभग घंटे भर की मुलाकात के बाद पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र संतुष्ट होकर निकले। मंगलवार को सर्किट हाउस में ऐसे भी क्षण आए, जब स्वत: मुख्यमंत्री भी भावुक हुए और कोरोना महामारी में पत्नी, बेटी को खो देने वाले सुरों के सम्राट छन्नू महाराज की आंखें भी छलछला गईं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा, पंडित जी आप देश नहीं दुनिया की धरोहर हैं। आपकी विश्वविख्यात ख्याति से हम सब गर्व महसूस करते हैं।
पंडित छन्नूलाल मिश्र ने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वयं फोनकर कुशलक्षेम जाना। हमारे दुख में वह खड़े हैं। अस्पताल प्रबंधन को लेकर मुझे पीड़ा रही। मुख्यमंत्री से कहा कि आप पर मुझे पूर्ण भरोसा है। पंडित मिश्र ने मुख्यमंत्री को मृत्युंजय महादेव के प्रसाद के रूप में इत्र भेंट किया।
जिला प्रशासन ने जांच में अस्पताल को क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन परिवार को जांच रिपोर्ट पर भरोसा नहीं था। पंडित मिश्र ने जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वह न्याय के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाएंगे। मेडिकल रिपोर्ट मिलने के बाद पंडित मिश्र की छोटी बेटी डॉ. नम्रता मिश्रा ने कहा था प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर हम लोगों को भरोसा नहीं है। पिताजी तो जांच रिपोर्ट मिलने के बाद से स्तब्ध हैं। एगी। इस मामले में जो भी दोषी होगा उसको बख्शा नहीं जाएगा।
पद्मविभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र के अनुसार सीएम ने बातचीत के दौरान मौजूद मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल से पूछा कि जब आदेश है कि हर कोविड अस्पताल में सीसीटीवी होनी ही चाहिए तो फिर इस अस्पताल में इसकी व्यवस्था क्यों नहीं थी। सीएम ने यह भी कहा कि संगीता मिश्रा की बेटी को पीपीई किट में मरीज के पास ले जाकर भी अस्पताल ने गलती की है।
नम्रता मिश्रा ने पूरे प्रकरण की लिखित जानकारी एक फाइल के रूप में मुख्यमंत्री को सौंपी। इस फाइल में मेडविन अस्पताल के खिलाफ अन्य लोगों की शिकायतों की कॉपी और जिला प्रशासन की ओर से ब्लैक लिस्टेड अस्पतालों की सूची भी संलग्न है। नम्रता मिश्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने करीब बीस मिनट तक फाइल के दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ा।