संगीत के सूक्ष्म और गूढ़ माने जानेवाले विषयों पर संगोष्ठियों व व्याख्यानों का आयोजन भी होगा और भिन्न-भिन्न विषयों पर विशेषज्ञों के साथ संवाद का अभिलेखन होगा। इस केंद्र में तकनीक की सुविधा से संपन्न एक पॉडकास्ट स्टूडियो भी होगा।
पिछले दिनों गिरिजा देवी की एकमात्र संतान, उनकी बेटी और जानी-मानी ओडिसी नृत्यांगना सुधा दत्ता कोलकाता से काशी आई हुई थीं। तभी दोनों पक्षों ने विक्रय अभिलेख पर हस्ताक्षर किए।
सुधा दत्ता ने बताया कि मां की विरासत को सही हाथों में सौंपकर मन को बेहद सुकून है। पद्मविभूषण गिरिजा देवी को ठुमरी सम्रज्ञी भी कहा जाता है। उन्हीं के नाम पर सांस्कृति संकुल भी है।