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लॉकडाउन में पद्मश्री महामहोपाध्याय से शिष्यों की जगह पोते-पोतियां ले रहे संस्कृत की दीक्षा

Sat, 18 Apr 2020 10:33 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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पद्मश्री महामहोपाध्याय भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी बच्चों के साथ। - फोटो : अमर उजाला।
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लॉकडाउन में पद्मश्री महामहोपाध्याय भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी वागीश शास्त्री(86) की वाग्योग चेतना पीठ पर भी सन्नाटा है। उनकी दिनचर्या भी आम दिनों के अनुसार बदल गई है। अब शिष्यों को मिलने वाला सारा समय घर के बच्चों को ही मिल रहा है। घर पर ही पोते और पोतियां संस्कृत का ज्ञान रोजाना हासिल कर रहे हैं। हालांकि शिष्यों को भी वह ऑनलाइन तंत्र दीक्षा नियमित प्रदान कर रहे हैं।

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तंत्र और संस्कृत के विद्वान आचार्य वागीश शास्त्री की सुबह पांच बजे शुरू हो जाती है। आठ बजे तक पूजन-साधना के बाद रामायण सीरियल देखना तो नियमित दिनचर्या बन चुका है। इसके बाद बारी आती है देश और विदेश में बैठे शिष्यों की।

ऑनलाइन प्रश्नों और शंकाओं का समाधान करने के बाद थोड़ा विश्राम और फिर पोते-पोतियों के साथ मनोरंजन। खेल-खेल में ही उनकी संस्कृत की शिक्षा भी चल रही है। कोई शिवतांडव के स्त्रोत को सीख रहा है तो कोई संस्कृत के गूढ़ श्लोकों को स्मरण कर रहा है।

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बच्चों को रोजाना शाम को छह से 7 बजे तक नीतिवचन और संस्कृत का पाठ कराना तो जैसे दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। वितानिका, वेदश्री, सुमित, राहुल, विद्महे शास्त्री, संगीता और आंचल रोजाना इसमें हैंडवाश और सैनिटाइजेशन के बाद शामिल होते हैं। इसके अलावा उनके लेखन के लिए भी पर्याप्त समय मिल रहा है।
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