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काशी में पद्मश्री का 'चौका', रत्नों ने बताई सम्मान मिलने में किसने है मुख्य भूमिका निभाई

Tue, 29 Jan 2019 10:24 AM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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राजेश्वर आचार्य - फोटो : amar ujala
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काशी के रत्नों को पद्मश्री मिलने के घोषणा के बाद लोग फूले नहीं समा रहे है। डॉ. राजेश्वर आचार्य, प्रशांति सिंह, हीरालाल यादव और डॉ. रजनीकांत के घर पर तो बधाई देने वालों का तांता लगा है। जिसमें डॉ. राजेश्वर आचार्य ने अपने पद्मश्री सम्मान को बाबा विश्वनाथ को सर्पित किया है।
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उन्होंने कहा, अधिकारी तो वही हैं हम तो महज पात्र हैं। जब तक सांस चले संगीत की सेवा करता रहूं। राज्य मंत्री नीलकंठ तिवारी, भाजपा के प्रदेश सह प्रभारी सुनील ओझा ने गणतंत्र दिवस पर उनके घर भदैनी जाकर पुष्पगुच्छ प्रदान किया। वहीं रविवार को शहर दक्षिणी कैंट से विधायक सौरभ श्रीवास्तव समेत संभ्रातजनों ने बधाई दी।

डॉ. राजेश्वर आचार्य ने संकट मोचन फाउंडेशन के साथ मिलकर ध्रुपद मेले का आयोजन शुरू करवाया। विश्व विद्यालय संकट मोचन संगीत समारोह में तत्कालीन महंत स्वर्गीय प्रो. वीरभद्र मिश्र के साथ अहम भूमिका निभाई। प्रो. राजेश्वर को जितनी महारथ संगीत क्षेत्र में हैं वे उतनी ही शिद्दत से काशी को जीते हैं।
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उन्हें महामना की बगिया का खूबसूरत नगीने माना जाता है। देश-विदेशों में उनके शिष्यों की लंबी शृंखला है। वह दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्व विद्यालय के फाइन आर्ट्स और संगीत विभाग के विभागाध्यक्ष रह चुके हैं और 1966 में ऑल इंडिया रेडियो म्यू्जिक कंपटीशन में पहला स्थान हासिल किया था। साथ ही ग्वालियर घराने से ताल्लुकात रखने वाले कलाकार हैं।

विषम परिस्थितियों ने निखारा प्रशांति सिंह को

प्रशांति सिंह
हमेशा से विषम परिस्थितियों ने ही मुझे और बेहतर करने का जज्बा दिया है। चाहे पुरस्कार हो या देश के लिए जीत। लगातार 15 सालों से अंतरराष्ट्रीय बॉस्केटबाल की दुनिया में बुलंदी को छूने वाली प्रशांति देश की ऐसी प्रथम महिला बॉस्केटबाल खिलाड़ी जिन्हें अर्जुन अवार्ड और पद्मश्री दोनों सम्मान मिले हैं।

अवार्ड की घोषणा के बाद घर पर जश्न जैसा माहौल है। शिवपुर स्थित आवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा है। प्रशांति अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय अपनी मां उर्मिला सिंह को देती हैं। जिन्होंने समाज की परवाह न कर वह फैसला किया जो उनकी बेटियों के लिए उचित था।

जब वह पैदा हुई थी तो परिवार की तीसरी बेटी थीं। उस समय बेटियों के पैदा होने पर हर कोई बातें करता था मगर आज सबको सिंह सिस्टर्स पर गर्व है। सिंह सिस्टर्स प्रियंका सिंह, दिव्या सिंह, प्रशांति सिंह, आकांक्षा सिंह और प्रतिमा सिंह जिस परिवार से आती हैं, वहां लड़कियों का खेलना अच्छा नहीं माना जाता था।

पेशे से अध्यापिका मां उर्मिला सिंह ने ऐसी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया और हमेशा प्रोत्साहित किया। पिता गोरीशंकर सिंह को अपनी बेटियों पर नाज है। प्रशांति देश की पहली ऐसी महिला बास्केटबॉल खिलाड़ी हैं जिन्होंने दो एशियन और एक कॉमनवेल्थ खेलों में हिस्सा लिया है।
 

के कहल ह कि हमके पद्मश्री मिलल बाः हीरालाल

बिरहा गायक हीरालाल यादव - फोटो : अमर उजाला
के कहल ह कि हमके पद्मश्री मिलल बा। पद्मश्री पुरस्कार की घोषणा हो जाने के दो दिन बाद भी बिरहा सम्राट पद्मश्री हीरालाल यादव की यह प्रतिक्रिया थी। उम्र 82 साल हो चुकी है। अस्वस्थ होने से बिस्तर पर हैं। ऊंचा सुनते हैं और जल्द भूल जाते हैं।

दो दिन में उन्हें कई बार बताया जा चुका है कि सरकार ने उन्हें पद्मश्री देने की घोषणा की है, पर हर बार उनकी यही प्रतिक्रिया होती है। रविवार दोपहर पुराने घर में हीरालाल यादव तख्त पर लेटे हैं। उनके पुत्र बचाऊ लाल यादव उन्हें पकड़कर बैठाते हैं तो संवाददाता की ओर देखकर पूछते हैं कि इह के हउंअ?

तब बचाऊ ने बताया कि पत्रकार हैं और आपसे मिलने आए हैं, आपको पद्मश्री मिली है। इस पर उन्हें विश्वास नहीं हुआ और तेज आवाज में बोले, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घोषणा कईलन ह, अच्छा एहिसे इहां हलचल मचल बा।’
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काशी की बुनकरी के थलाइवा हैं डॉ रजनीकांत

डॉ रजनीकांत - फोटो : amar ujala
वर्ष 2000 काशी की बुनकरी की हालत खस्ता होने लगी थी। 2005 में स्थिति तब और भयावह हो गई जब बनारसी के नाम पर चीन के हूबहू उत्पाद बेहद कम दाम पर देश में बिकने लगे। बुनकर रोजगार खोकर पलायन करने लगे। 

ऐसे में डॉ. रजनीकांत काशी की बुनकरी को बचाने के लिए थलाइवा (नेतृत्व कर्ता) बनकर आए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनाइटेड नेशन कांफ्रेंस ऑन ट्रेड डेवलपमेंट के साथ मिलकर काम शुरू किया। तय हुआ कि बनारसी साड़ी को ग्लोबल इंडिकेशन (जीआई) दिलाया जाए।

छह माह की मेहनत के बाद दस्तावेज तैयार कर 2007 में चेन्नई के जीआई रजिस्ट्री कोर्ट में फाइल किये। दो साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सितंबर 2009 में बनारस ब्रोकेड और साड़ी को जीआई का पंजीकरण मिला। डॉ. रजनीकांत की संस्था ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन ने 1993 से महाजन के चंगुल में फंसी भूमिहीन महिलाओं के लिए लड़ाई शुरू की थी।

गरीब बच्चों खासकर बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ा। चिरईगांव, अराजीलाइन, चोलापुर, विद्यापीठ ब्लाक सहित विभिन्न क्षेत्रों में 360 महिला स्वयं सहायता समूह बनाए। इनसे 3750 महिलाएं जुड़ी हैं। डॉ. रजनीकांत ने बताया कि बुनकरी के बाद भदोही के कालीन, मिर्जापुर की दरी, लकड़ी के खिलौने, गुलाबी मीनाकारी सहित 10 उत्पादों का जीआई कराया।

अभी और सात उत्पादों को जीआई दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद डॉ. रजनीकांत को बधाई देने के लिए उनके घर पर लोगों का तांता लगा रहा। काशी और गोरखपुर क्षेत्र के लोकसभा प्रभारी सुनील ओझा और राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी के घर पहुंचे और उनका सम्मान किया।
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