गुलाब बाग... कभी अपनी खूबसूरती से अपने नाम को सार्थक करने वाला यह पार्क अब अपने वजूद के लिए जूझ रहा है। न हरियाली, न चहल-पहल। जीर्ण-शीर्ण चहारदीवारी के बीच गंदगी के ढेर में छुट्टा पशुओं का जमावड़ा और इक्का-दुक्का पेड़ों के सिवा अब यह कुछ भी नहीं बचा है। बीचोबीच ओवरहेड टैंक बना दिया जाने और सिगरा थाने का कबाड़ यहां इकट्ठा होने से हालात और बदतर हो गए हैं। जबकि, यह पार्क बीच शहर सिगरा थाने के ठीक सामने स्थित है। इसे संवार दिया जाए तो न सिर्फ यहां की घनी आबादी के बाशिंदों को सुबह-शाम हरियाली के बीच सुकून के पल गुजारने की ठांव मिल जाएगी बल्कि राहगीर भी यहां छांव तलाश सकेंगे।
अमर शहीद सेवा समिति की ओर से 23 जनवरी 1982 को इस पार्क में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आदमकद प्रतिमा लगाई गई। साथ ही, पार्क का सुंदरीकरण भी कराया गया। उसके बाद नगर निगम की ओर से चहारदीवारी बनवाकर गेट तो लगवा दिया गया लेकिन देखरेख की सुध नहीं ली गई। नतीजा, पार्क अपनी खूबसूरती खोने लगा।
कभी लोग सुबह-शाम पार्क में टहला करते थे। बच्चे खेलकूद के लिए आया करते थे लेकिन अब हालत इतनी खराब हो गई है कि लोग यहां आने से भी कतराते हैं।
चहारदीवारी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। छुट्टा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। पार्क के बाहर सिगरा थाने के कबाड़ के वाहनों का ढेर लगे रहने से हालत और बदतर हो गई है। 1950 वर्ग मीटर में फैले पार्क में जेएनएनयूआरएम के तहत पेयजल ओवरहेड टैंक और ट्यूबेल भी लगा दिया गया है। इससे पार्क और बदहाल हो गया। पार्क में जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं।
पार्क की दशा सुधारने का कभी कोई प्रयास नगर निगम की ओर से नहीं किया गया। अलबत्ता, इस बारिश में यहां 98 पौधे लगाने का लक्ष्य जरूर रखा गया है। लोगों का कहना है कि सिर्फ कुछ पौधे लगाने से पार्क का भला नहीं होने वाला। जरूरी है कि पार्क का सौंदर्यीकरण कराकर उसे हरा-भरा बनाया जाए और उसकी देखरेख की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।