विभागाध्यक्ष ने 72 घंटे में कैथ लैब को खाली करने का आदेश दिया था। अब 25 अप्रैल को फार्मेसी की ओर से जो जवाब आया है, उसने फार्मेसी के संचालन को वैध बताया है। किसी तरह की कंपनियों की भागीदारी से भी इंकार किया, साथ ही सभी को सामान का बिल भी दिया जा रहा है।
कैथ लैब में मरीजों को लगने वाले स्टंट सहित अन्य सामानों का रेट निर्धारित करने की तैयारी चल रही है। विभागाध्यक्ष प्रो. ओमशंकर ने बताया कि एंजियोप्लास्टी का रेट निर्धारित होने के बाद मरीजों को बड़ी राहत होगी। जब कैथ लैब में मरीजों का इलाज 22 से 25 हजार रुपये में हो जा रहा है तो वह 50 से 60 हजार क्यों खर्च करेगा। बताया कि अगर फार्मेसी इंचार्ज ने दुकान खाली नहीं किया तो ठोस कार्रवाई की जाएगी।