बीएचयू अस्पताल की ओर से डायग्नोस्टिक इमेजिंग सेवाओं के संचालन, रखरखाव और प्रबंधन के सेवा प्रदाता के चयन के लिए टेंडर जारी किया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसका टेंडर निरस्त कर दिया गया था।
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. कैलाश कुमार, रेडियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एएनडी द्विवेदी, चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय की डिप्टी रजिस्ट्रार रश्मि रंजन और पल्स डायग्नोस्टिक के एमडी मनोज कुमार शाह व निदेशक सुनैना बिहानी के खिलाफ लंका थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। ये कार्रवाई अदालत के आदेश पर की गई है। अदालत ने लंका थानाध्यक्ष को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था।
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केस दर्ज करने का आदेश एसीजेएम तृतीय पवन कुमार सिंह-II की अदालत ने रश्मि नगर, लंका के नोबल हेल्थ सर्विस के डॉ. उदयभान सिंह के प्रार्थना पत्र पर दिया है। मामला बीएचयू अस्पताल के एक टेंडर में अनियमितता बरतने के आरोप से संबंधित है।
डॉ. उदयभान सिंह के अनुसार, बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल की ओर से छह अगस्त 2024 को पीपीपी मोड पर डायग्नोस्टिक इमेजिंग सेवाओं के संचालन, रखरखाव और प्रबंधन के सेवा प्रदाता के चयन के लिए टेंडर जारी हुआ था। 19 सितंबर 2024 को उन्होंने भी टेंडर भरा। टेंडर के तकनीकी मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष व समन्वयक प्रो. कैलाश कुमार थे। डॉ. एएनडी द्विवेदी और रश्मि रंजन कमेटी की सदस्य थीं। 30 दिसंबर 2024 को उन्हें सूचना दी गई कि तकनीकी मूल्यांकन समिति ने उनका टेंडर निरस्त कर दिया।
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इसलिए अदालत की शरण में जाना पड़ा
डॉ. उदयभान सिंह ने बताया कि उनका टेंडर निरस्त होने से निराशा हुई। पता किया तो सामने आया कि टेंडर भरने में पल्स डायग्नोस्टिक के मनोज कुमार शाह और सुनैना बिहानी ने फर्जी जीएसटी नंबर का इस्तेमाल किया है। इसके बावजूद पल्स डायग्नोस्टिक के टेंडर को तकनीकी मूल्यांकन समिति ने अप्रूव कर दिया।
डॉ. सिंह ने कहा कि पांचों लोगों ने विश्वविद्यालय के पैसे को हड़पने की नीयत से फर्जी कागजात की मदद से टेंडर की कार्रवाई मनमाने ढंग से की। फरवरी 2025 में बीएचयू के उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई। लंका थाने में तहरीर दी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद अदालत की शरण में जाना पड़ा।