किसानों के दर्द को अनसुना कर दिया गया। एक धेला भी मुआवजे के नाम पर किसानों को नहीं दिया गया। ऐसे में प्रदेश व जिले के किसान दुखी हैं तो मैं कैसे होली की खुशी मनाऊंगा। मैं भी किसान का बेटा हूं, मेरा भी मन दुखी है। जबकि होली हर्ष और उल्लास का पर्व है। सरकार के तानाशाही रवैये के कारण किसानों की खुशी छिन गई है।
चौधरी ने कहा कि किसान तो किसान समाज का कोई तबका इस सरकार से खुश नहीं है। अभी सीएए के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान सरकार ने गोली चलवाकर 25 मुसलमानों को मौत के घाट उतार दिया। जब हमारे समाज का एक बड़ा धड़ा पीड़ा में है, ऐसे में होली मनाना उचित नहीं लगता। मैं सरकार से मांग करता हूं कि खरीफ और रबी दोनों फसलों का मुआवजा देकर सरकार किसानों के दुख-दर्द को कम करने का प्रयास करे।