केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के यूपी चुनाव के सह प्रभारी अनुराग ठाकुर ने बुधवार को सपा-रालोद गठबंधन पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को लोकतंत्र में विश्वास नहीं है। इन लोगों को जनता फिर सबक सिखाएगी। रालोद नेता जयंत चौधरी के मतदान न करने पर कहा कि ऐसे लोगों को बैठे-बिठाये राजनीति करने की आदत लग चुकी है, इसलिए इन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों की कद्र नहीं है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा, यूपी को गुंडा कहने वाली दीदी गुंडों को समर्थन करने वाले अखिलेश के साथ खड़ी हैं।
केंद्रीय मंत्री ने सिगरा क्षेत्र में भाजपा के लिए विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मीडिया से अनौपचारिक बातचीत की। उन्नाव में सपा नेता के खेत में दलित युवती की लाश मिलने पर कहा कि इसके पीछे जो भी होगा उसे सरकार बख्शेगी नहीं, दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। योगी सरकार ने पिछले पांच वर्षों में महिला सुरक्षा को सुनिश्चित किया। सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर की बाइक पर तीन सवारी वाले बयान पर कहा कि कुछ लोग चुनाव आते ही ऐसी बातें करने लगते हैं जिसकी कोई जरूरत नहीं है। कांग्रेस में टिकट बंटवारे के बाद मचे घमासान पर उन्होंने कहा, उनका खाता उत्तर प्रदेश में नहीं खुलने जा रहा है। जनसंपर्क के दौरान क्षेत्रीय अध्यक्ष महेश चंद श्रीवास्तव, विद्या सागर राय, संजय मयूख, मनीष दीक्षित, धर्मेंद्र सिंह, नवरतन राठी, संतोष सोलापुरकर, नवीन कपूर, जगदीश त्रिपाठी आदि लोग उपस्थित रहे।
यूनिफार्म व अनुशासन से चलते हैं स्कूल-कॉलेज
हिजाब मामले में प्रियंका गांधी द्वारा दिए गए बयान पर अनुराग ठाकुर ने कहा कि स्कूल-कॉलेज यूनिफार्म व अनुशासन से चलते हैं। हर चुनाव में नए-नए प्रयोग करने का प्रयास करते हैं और इस तरह के मुद्दे लाते हैं, मगर जनता इसे स्वीकार नहीं करती। मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र की जमानत पर कहा गरीब आदमी की जमानत हो या नेता के पुत्र की, केस के तथ्यों को देखकर कोर्ट निर्णय लेती है, आशीष मिश्रा को जमानत का निर्णय न्यायपालिका का है।
दोनों सीटों से चुनाव हारेंगे अखिलेश
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के करहल के बाद आजमगढ़ के मुबारकपुर से चुनाव लड़ने के सवाल पर अनुराग ठाकुर ने कहा कि आप लिखकर ले लें, अखिलेश दोनों सीटों पर चुनाव हारेंगे। हमने करहल से एसपी सिंह बघेल को उतारा है। राहुल गांधी पर कहा कि वे कभी चुनाव आयोग तो कभी कोर्ट और सभी संवैधानिक संस्थाओं पर कुछ भी बोलते रहते हैं, यह उनकी घबराहट का नतीजा है। उनके चेहरे व जुबान पर हार की बौखलाहट साफ दिखने लगी है।