मौसम के पूर्वानुमान की सटीक जानकारी के लिए 2013 में किसान पोर्टल शुरू किया गया लेकिन पिछले चार वर्ष में इस पोर्टल से केवल दो करोड़ किसान ही जुड़ पाए। देश भर में किसानों के करीब 14 करोड़ परिवार हैं। ऐसे में हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती इन किसानों को इस पोर्टल से जोड़ना है।
यह जानकारी भारत मौसम विज्ञान विभाग के डॉ. केके सिंह ने शुक्रवार को बीएचयू के दुग्ध एवं पशुपालन विभाग के कामधेनु सभागार में चल रहे जलवायु दृष्टिकोण मार्गदर्शी फोरम की कार्यशाला के समापन के बाद दी।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अपर महानिदेेशक डॉ. अतुल कुमार सहाय ने बताया कि मौसम के पूर्वानुमान के साथ ही जलवायु परिवर्तन और इसके प्रभावों को लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए इसके लिए अलग विभाग क्लाइमेट रिसर्च सर्विसेज की शुरुआत की गई है।
मौसम के पूर्वानुमान में डिजिटल इंडिया प्रभावी
बीएचयू के महामना जलवायु परिवर्तन उत्कृष्ट शोध केंद्र की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय जलवायु दृष्टिकोण मार्गदर्शी फोरम कार्यशाला के दूसरे दिन शनिवार को पूर्वानुमान के माध्यम से फसल सुरक्षा, जल प्रबंधन, जलवायु जनित आपदाओं, स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया।
डॉ. केके सिंह ने डिजिटल इंडिया अभियान के तहत कृषि मौसम सेवा एकीकरण की योजना के बारे में बताया। आईएमएस बीएचयू के डॉ. राजनीति प्रसाद ने बताया कि जलवायु परिवर्तन और बीमारियों के बीच परस्पर संबंध है। ऐसे में चिकित्सकों को भी मौसम के पूर्वानुमान की सटीक जानकारी होनी जरूरी है।