जिले में सप्तसागर दवा मंडी में करीब 650 दुकानों के साथ ही शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक 6000 से अधिक दुकानें हैं। दवा विक्रेताओं की संस्था ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) के आह्वान पर स्थानीय स्तर पर दवा विक्रेता समिति के पदाधिकारियों ने पिछले पांच दिनों से जागरूकता अभियान चलाया। दवा कारोबारियों में पंपलेट बांटकर लोगों से 20 मई को दुकानें बंद रखने की अपील की गई थी।
बुधवार को दुकानदारों ने अपनी दुकानें खोली ही नहीं। दवा विक्रेता समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार और महामंत्री संजय सिंह ने दिन में लंका, शिवपुर, सोनिया, लहुराबीर, कबीरचौरा और पांडेयपुर आदि क्षेत्रों का दौरा कर दवा कारोबारियों का उत्साह बढ़ाया। दवा मंडी को छोड़ जिले की अन्य दुकानों के ताले शाम 6 बजे के बाद खुल गए।
अस्पतालों के अंदर खुली रहीं दुकानें, दिखी भीड़
बंदी के दौरान सरकारी और निजी अस्पतालों के अंदर चल रही दवा दुकानों को इमरजेंसी सेवा के तहत खुला रखा गया था। बीएचयू कैंपस के अंदर संचालित फार्मेसी पर मरीजों की भीड़ दिखी, जबकि जिला और मंडलीय अस्पताल में चल रहे दवा काउंटरों से अधिकांश मरीजों को दवाइयां मिल गईं। हालांकि जो दवाइयां अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं, उन्हें लेने के लिए मरीज और तीमारदार पर्चा लेकर भटकते रहे।
बंदी का दिखा आंशिक असर
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट फेडरेशन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष और केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के जिला महामंत्री संदीप चतुर्वेदी ने दावा किया कि जिले में बंदी का केवल आंशिक असर देखने को मिला। कई दुकानें खुली रहीं। उन्होंने कहा कि सप्तसागर दवा मंडी में भी कई दुकानें खुली थीं।
इसके अलावा बड़ागांव, फूलपुर, पिंडरा, अर्दली बाजार, पांडेयपुर, पहड़िया और चौबेपुर आदि क्षेत्रों में बंदी का असर नहीं दिखा। लंका में सुबह दवा कारोबारियों के एक गुट ने कुछ दुकानों को बंद कराया। कबीरचौरा और लहुराबीर में दुकानें पूरी तरह बंद रहीं, जबकि कैंट स्टेशन, सिगरा, सोनिया, मंडुआडीह, गुरुबाग, महमूरगंज और लक्सा क्षेत्र की दुकानें खुली दिखीं।