बीएचयू महिला महाविद्यालय की छात्राएं शायद ही 23 सितंबर 2017 की वह रात भूल पाए, जब उन पर लाठियां बरसाई गई थीं। आज भी उस घटना का जिक्र करने के बाद उनकी आंखें भर आती है।
घटना के बाद जांच करने और जल्द ही कार्रवाई का भरोसा भी विश्वविद्यालय, जिला और पुलिस प्रशासन के साथ ही महिला आयोग की टीम ने दिया था। लेकिन पूरे एक साल बाद आज तक यह तय नहीं हो सका कि आखिर किसने महाविद्यालय गेट से अंदर घुसकर छात्राओं पर लाठीचार्ज किया था।
पिछले साल छेड़खानी की इस घटना के बाद सुरक्षा को लेकर बातें भी बड़ी-बड़ी हुई लेकिन तब से लेकर अब तक आधा दर्जन से अधिक ऐसी घटनाएं हुई, जिससे इन दावों पर सवाल खड़े हुए।
लाठीचार्ज की घटना के बाद देश ही नहीं विदेशों में इसकी निंदा हुई, न्याय को लेकर छात्र संगठनों के साथ ही सामाजिक, राजनीतिक संगठनों ने आवाज उठाई और दोषियों को चिह्नित कर कार्रवाई की मांग की लेकिन यह सब केवल कागजों पर ही चला।
महिला आयोग की टीम भी यहां आई, छात्राओं, शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों के बयान भी हुए। लेकिन अब तक यह पता ही नहीं चल सका कि महिला महाविद्यालय गेट पर लाठीचार्ज किसने किया। कोई इसके लिए विश्वविद्यालय सुरक्षा कर्मियों को को जिम्मेदार ठहराता है तो कोई पुलिस, पीएसी जवानों को। महिला महाविद्यालय की छात्राएं ही नहीं कुछ शिक्षकों को भी इस घटना में चोट आई थी।
इसमें से एक डॉ. प्रतिमा गौड़ का कहना है कि उस रात को भूल पाना मुश्किल है। जिस तरह से गेट के अंदर घुस कर छात्राओं पर लाठीचार्ज किया गया और उन्हें बचाने गई शिक्षकों पर भी लाठियां बरसाई गई। उससे चोट लगी वह तो ठीक हो गया लेकिन दर्द अभी भी है। प्रशासन अभी तक यह नहीं पता लगा पाया कि आखिर ऐसा किसने किया।