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''''एक राष्ट्र, एक चुनाव'''' से आएगी स्थिरता, बार-बार चुनाव से बाधित होते हैं विकास कार्य : डॉ. सुधांशु त्रिवेदी

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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के स्वतंत्रता भवन सभागार में बृहस्पतिवार को ''''''''एक राष्ट्र, एक चुनाव'''''''' पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता, राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि देश की दीर्घकालिक स्थिरता, विकास और प्रशासनिक दक्षता के लिए ''''''''एक राष्ट्र, एक चुनाव'''''''' आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार जो ठान लेती है, उसे हर हाल में पूरा करती है। विपक्षी दल इस व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं, लेकिन मोदी सरकार दृढ़ संकल्पित है और इसे लागू कर देश को एक नई दिशा देगी।
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भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने जब लोकतंत्र की संकल्पना की, तब एक साथ चुनाव कराने का ही निर्णय लिया था। 1952 से 1967 तक देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते थे, लेकिन बाद में यह प्रक्रिया बाधित हो गई। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव कराने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं, प्रशासनिक कार्यों में बाधा आती है और आर्थिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
उन्होंने कहा, 1996-97-98 में हुए चुनावों के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि लोकतंत्र की धड़कन चुनाव है, लेकिन यदि धड़कन बहुत तेज हो तो यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इसी तर्ज पर आज भी हर साल चुनाव कराना देश के आर्थिक और प्रशासनिक संसाधनों पर भारी पड़ता है। कहा कि यदि भारत को वैश्विक शक्ति बनाना है तो हमें दीर्घकालिक योजनाओं पर ध्यान देना होगा, जो बार-बार होने वाले चुनावों से संभव नहीं हो पातीं। कहा कि संपूर्ण देश में एक साथ चुनाव होने से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी। एक प्रतिशत से अधिक जीडीपी की बचत होगी। इंफ्लेशन दर में कमी आएगी। राजनीतिक प्रतिस्पर्धा स्वस्थ होगी और जात-पात की राजनीति में कमी आएगी। चुनाव खर्च में कटौती होगी और जनता के धन का सही उपयोग होगा। राजनीति में स्थिरता आने से दीर्घकालिक विकास योजनाओं को गति मिलेगी। अध्यक्षता कर रहे बिहार और मेघालय के पूर्व राज्यपाल फागू चौहान ने ''''''''एक राष्ट्र, एक चुनाव'''''''' को देश की जरूरत बताया। कहा कि इससे विकास को गति मिलेगी और राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित होगी। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ने बीएचयू के संस्थापक पं मदन मोहन मालवीय के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया और कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान हुआ। इस दौरान राज्यमंत्री डॉ दयाशंकर मिश्र दयालु, विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, प्रदेश महामंत्री एवं एमएलसी अनूप गुप्ता, क्षेत्रीय अध्यक्ष दिलीप पटेल, जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा, क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी नवरतन राठी, काशी मंथन के संस्थापक डाॅ. मयंक नारायण सिंह, संयोजक अशोक चौरसिया समेत अन्य मौजूद रहे।
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हमें स्वराज 1947 में मिला था, लेकिन हम वास्तव में स्वतंत्र नहीं हुए
डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने ''''''''बांटो और राज करो'''''''' की नीति अपनाकर जात-पात और ऊंच-नीच की राजनीति को बढ़ावा दिया। हमें स्वराज 1947 में मिला था, लेकिन हम वास्तव में स्वतंत्र नहीं हुए थे। क्योंकि भारत पर विदेशी प्रभाव हावी था। हमारे समाज में मैकाले और मार्क्स का जहर घोल दिया गया ताकि हम कभी एकजुट होकर आगे न बढ़ सकें।
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