याचिका में यह भी कहा गया कि काशी विश्वनाथ अधिनियम 1983 पुराने मंदिर में मौजूद ज्योतिर्लिंग और आदि विश्वेश्वर के अस्तित्व को मान्यता देता है। अदालत से अनुरोध किया गया है कि देवी गंगा, हनुमान, गणेश, नंदी और आदि विश्वेश्वर के साथ ही मां शृंगार गौरी के उपासक सभी देवी-देवताओं के पूजा करने के अधिकारी हैं।
मौजूदा इमारत को ध्वस्त करने के बाद प्रतिवादी पक्ष को नए निर्माण में हस्तक्षेप करने से रोका जाए। काशी विश्वनाथ मंदिर के न्यासी मंडल को शृंगार गौरी, आदि विश्वेश्वर और अन्य देवी-देवताओं का पूजन बहाल करने का निर्देश दिया जाए। अदालत ने याचिका की पोषणीयता पर सुनवाई के लिए नियमित अदालत को संदर्भित कर दिया है। नियमित अदालत यानी सिविल जज सीनियर डिवीजन के अवकाश पर होने के कारण मामला अपर सिविल जज द्वितीय कुमुदलता त्रिपाठी की अदालत में पेश किया गया था।