वाराणसी। महाकवि भास के संस्कृत नाटक ‘कर्णभारम’ को पहली बार काशी के युवा कलाकारों ने विश्व मंच पर पहचान दिलाई है। थाईलैंड की राजधानी बैंकाक में हुए 16वें विश्व संस्कृत संस्कृत सम्मेलन में इस नाटक का मंचन वहां की राजकुमारी महाचाकरी सीरीन्धोर्न की इच्छा पर मंचित किया गया, लेकिन किसी कारण से वह उन क्षणों की साक्षी नहीं बन सकीं।
60 देशों के 600 से अधिक संस्कृत विद्वानों की मौजूदगी में इस संस्कृत नाटक के संगीत और अभिनय की मुक्त कंठ से सराहना की गई।
सांस्कृतिक संस्था ज्ञान प्रवाह की ओर से तैयार इस नाटक की बैंकाक में प्रस्तुति के बाद युवा कलाकार बेहद उत्साहित हैं। इस नाटक का निर्देशन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के समन्वयक प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के वेद विभागाध्यक्ष प्रो. युगल किशोर मिश्र, आर्य महिला पीजी कॉलेज की डॉ. चंद्रकांता राय ने किया।
पारंपरिक छाऊ नृत्य शैली पर आधारित नृत्य निर्देशन किया शशधर आचार्य ने। संगीत निर्देशन अंजना पुरी का था। जबकि नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) के रंग निर्देशक बंशी कौल और वाणी त्रिपाठी ने रंग परामर्श दिया।
पहली बार थाईलैंड में 60 देशों के 600 से अधिक विद्वानों की उपस्थिति में इस नाटक का मंचन किया गया। आईसीसीआर की ओर से प्रायोजित इस नाटक के मंचन के लिए 30 सदस्यीय रंगकर्मियों का दल 26 जून को थाईलैंड के लिए रवाना हुआ था। यह सम्मेलन शिल्प कार्न विश्वविद्यालय और इंटरनेशनल एसोसिएशन आफ संस्कृत स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित था।