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पटना एसपी की सूचना पर यूपी वाराणसी के कैंट स्टेशन पर मच गया हड़कंप

Wed, 15 Jan 2020 01:38 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल करते पुलिस कर्मी - फोटो : AMAR UJALA
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मालदा से नई दिल्ली जा रही फरक्का एक्सप्रेस में अपहर्ता की सूचना पर बुधवार को आरपीएफ-जीआरपी ने कैंट रेलवे स्टेशन पर सघन चेकिंग अभियान चलाया। बिहार के पटना के एसपी की सूचना पर दोपहर में पहुंची फरक्का एक्सप्रेस में रेलवे सुरक्षा तंत्रों ने सघन जांच-पड़ताल की।

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जनरल, स्लीपर और वातानुकूलित कोच में जवानों ने अपहरणकर्ता की फोटो से यात्रियों के बीच मिलान कराया। इस दौरान जीआरपी ने एक संदिग्ध यात्री को हिरासत में लिया, जिसे पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। जांच अभियान के दौरान करीब 30 मिनट से अधिक की देर से ट्रेन खड़ी है।

बजरंगी की हत्या के बाद सक्रिय हुआ माफिया सिंडिकेट

वाराणसी। बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या और मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी के पंजाब जेल में शिफ्ट होने के बाद पूर्वांचल के रेलवे के ठेकों को लेकर बनारस का माफिया सिंडिकेट सक्रिय हुआ। पुलिस सूत्रों के अनुसार, माफिया सिंडिकेट पूर्वांचल ही नहीं अब बिहार तक के रेलवे के ठेकों पर अपना और अपने लोगों का वर्चस्व चाहता है। इसके लिए ठेकेदारों को समझाने, धमकाने से लेकर सत्ता की हनक तक का सहारा लिया जा रहा है।

ट्रेन में सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल करते पुलिस कर्मी - फोटो : amar ujala

80 के दशक में पूर्वांचल से लेकर लखनऊ और बिहार के रेलवे के ठेकों को लेकर गोरखपुर से वर्चस्व की लड़ाई शुरू हुई। 90 के दशक में जमकर खूनखराबा हुआ और माफिया गिरोहों के सरगना भी मारे गए। इसके बाद मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी और उनके करीबी माने जाने वाले मुन्ना बजरंगी के गिरोह से जुड़े ठेकेदारों का रेलवे और डीरेका के ठेकों पर वर्चस्व हो गया।

जुलाई 2018 में बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद मुख्तार अंसारी पंजाब की जेल में शिफ्ट हो गए। माफिया सिंडिकेट के लिए रेलवे और डीरेका के ठेकों में पैठ जमाने का यह अच्छा अवसर था। इसी बीच बीते साल लोकसभा चुनाव से पहले माफिया सिंडिकेट के साथ बनारस, जौनपुर, भदोही, चंदौली और मिर्जापुर के जरायम जगत के अन्य चर्चित नाम भी जुड़ गए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
इसका परिणाम यह हुआ कि मुख्तार अंसारी और मुन्ना बजरंगी के खेमे से जुड़े ठेकेदार अपनी जान की खातिर रेलवे के ठेकों से पीछे हटते गए। एक ठेकेदार ने बताया कि अब स्पष्ट संदेश है कि रेलवे की ठेकेदारी करना है तो माफिया सिंडिकेट की सरपरस्ती में करना है और उनकी मर्जी अनुसार 10 से 20 प्रतिशत तक कमीशन देना है। जो ठेकेदार माफिया सिंडिकेट के हिसाब से काम नहीं करता है उसे तरह-तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
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