खेलों का महाकुंभ टोक्यो ओलंपिक 23 जुलाई से प्रारंभ होगा। प्रदेश से कई खेलों के खिलाड़ी ओलंपिक तक पहुंचे हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इनमें एक भी कुश्ती का नहीं है। इसके पीछे की वजह संसाधनों और सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में काशी के वर्तमान पहलवान दंगल तक की ही सीमित हैं। इनमें से कई खिलाड़ी ऐसे भी हैं जो दूसरे राज्यों से खेल रहे हैं। कई ओलंपिक का टिकट भी कटा चुके हैं। वहीं, कुछ कुश्ती करते हैं वह सिर्फ दंगल तक की सीमित हैं।
ओलंपियन सुशील कुमार को मुल्तानी दाव का गुर सीखाने वाले बरेका कोच रविंद्र मिश्रा ने बताया कि काशी के पहले ओलंपियन पहलवान अनंत राम भार्गव ने 1948 के लंदन ओलंपिक में प्रतिभाग कर मान बढ़ाया था। 1956 के मेलबर्न ओलंपिक में लक्ष्मीकांत पांडेय और महाराष्ट्र से 2012 के लंदन ओलंपिक में चोलापुर के रहने वाले नरसिंह यादव ने प्रतिभाग किया।
दिवंगत ओलंपियन लक्ष्मीकांत पांडेय के पुत्र कपिल नारायण पांडेय ने कहा दुर्भाग्य की बात है कि टोक्यो ओलंपिक में यूपी का एक भी पहलवान नहीं है। पिता मेलबर्न ओलंपिक में गद्दे पर कुश्ती का अभ्यास नहीं होने पर पदक नहीं जीत पाए। ऐसा सुविधाओं के अभाव में हुआ। तब से अब तक कोई बदलाव नहीं आया।
कोच, डाइट मिले तो बने बात
खिलाड़ियों का कहना है कि ओलंपिक स्तर के आधुनिक गद्दे, कुशल कोच, खानपान और हॉस्टल की सुविधा मिले तो मेडल का सफर आसान हो सकता है। लेकिन सुविधाएं नहीं मिलने पर बनारस में कुश्ती को लेकर न तो खिलाड़ियों में उत्साह है न उनके परिजनों में और न ही खेल विभाग को कोई दिलचस्पी है। जिसकी वजह से टोक्यो ओलंपिक में एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, निशानेबाजी और हॉकी में पूरे यूपी से 10 खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया, लेकिन इसमें कुश्ती का कोई भी नहीं है।
बोले पहलवान
पहलवानों को सिर्फ जिले की खेल सुविधा मिलती है वह नाकाफी है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण और खुराक मिले तो काशी के पहलवान हर ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर सकते हैं।
- पूजा यादव, पहलवान
हरियाणा और पंजाब की तरह अगर यूपी के पहलवानों को भी खेल के साथ नौकरी, प्रोत्साहन और सहयोग मिले तो प्रति वर्ष राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार होंगे।
- विक्की, पहलवान