मरम्मत के लिए अलग बजट नहीं
पहले अलग-अलग डिजाइन की स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थीं। कहीं हेरिटेज कहीं ईएसएसएल ने एलईडी लाइटें लगवाईं। मरम्मत के लिए बजट न होने पर काफी दिक्कत होती है। यही कारण है कि लाइटों की मरम्मत नहीं हो पाती है। कई बार बजट के अभाव में पुरानी को हटाकर नई लाइटें लगवानी पड़ती हैं।
हर वार्ड को 7-7 लाख मिले फिर भी नहीं लगीं लाइटें
नौ महीने से हर वार्ड को लाइट के लिए 7-7 लाख रुपये दिए गए हैं, लेकिन अब तक सभी वार्डों में लाइटें नहीं लग पाई हैं। निगम के अधिकारियों ने बताया कि पोल की अलग-अलग डिजाइन के कारण लाइट लगने की रफ्तार धीमी है। ज्यादातर सीमेंट, लोहे, बिजली और रेल पोल हैं। जिनके हिसाब से क्लैंप बनवाने पड़ रहे हैं। जिसकी वजह से देरी हो रही है।
सभी वार्ड को 7-7 लाख रुपये दिए गए हैं। दुर्गा पूजा के समय सभी लाइटें दुरुस्त करने का निर्देश आलोक विभाग को दिया गया है। जल्द ही बैठक कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराया जाएगा। - अशोक कुमार तिवारी, मेयर