महंत आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही अधिकारियों ने सेटिंग करने के लिए प्राथमिकताएं बदल दी हैं। पूर्ववर्ती सरकार के करीबी माने जाने वाले अफसर उल्टी गिनती में शामिल होने से बचने के लिए अपने कार्यालयों में समाजवादी पेंशन, समाजवादी आवास, समाजवादी एंबुलेंस आदि योजनाओं के बजाय केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन, डिजिटल इंडिया योजना आदि पर चिंतन-मंथन करने लगे हैं।
माना जा रहा है कि जिन अफसरों पर सपा नेताओं की मेहरबानी रही है, उन्हें साइड लाइन कर दिया जाएगा। बता दें कि डीएम योगेश्वर राम मिश्र को छोड़कर बाकी सभी अधिकारी सपा सरकार के समय से जमे हैं। 15 अक्तूबर को राजघाट पुल पर भगदड़ में 25 लोगों की मौत के बाद शासन ने डीएम और एसएसपी को हटा दिया था।
इस मामले में एडीएम सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट, एसपी सिटी और एसपी सिटी को निलंबित कर दिया गया था। इस कारण वाराणसी प्रशासन में कई अधिकारी नए हैं। हालांकि इनके मातहतों में कई अधिकारी सपा के शासनकाल से यहां जमे हुए हैं। चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद आईजी एसके भगत को भी चुनाव आयोग के निर्देश पर हटा दिया गया था।
आचार संहिता समाप्त होने के बाद से डीएम ने एसडीएम राजातालाब त्रिभुवन राम को हटाकर उनकी जगह प्रशिक्षु आईएएस इशा दुहन को तैनात किया था। पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटेल की पैरवी पर त्रिभुवन राम की तैनाती की गई थी। एसडीएम पिंडरा अविनाश कुमार और एसडीएम सदर आर्यका अखौरी दोनों प्रशिक्षु आईएएस हैं और मौजूदा पदों पर उनकी अवधि पूरा हो चुकी है।