नंबर प्लेट पर पदनाम के साथ ही शीशों पर विभाग के स्टीकर भी लगाए गए हैं।
आचार संहिता की धौंस दिखाकर जनप्रतिनिधियों के वाहनों का चालान करने वाले जिम्मेदार अफसर खुद नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। विधायक और सांसद लिखे वाहनों का आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में चालान कर दिया जा रहा है, जबकि इसका आचार संहिता से नहीं बल्कि हाईकोर्ट के उस आदेश से वास्ता है, जिसमें स्पष्ट गाइड लाइन है कि वाहन पर नंबर के अलावा कुछ नहीं लिखा होना चाहिए। मोटर व्हेकिल एक्ट में भी यही प्रावधान है लेकिन पदनाम लिखे अफसरों के वाहन धड़ल्ले से आ-जा रहे हैं। नीली बत्ती लगाकर चलने वाले ज्यादातर अफसरों की गाड़ियों पर उनका पदनाम लिखा हुआ है।
चार दिन पूर्व विजय मॉल के पास पुलिस ने कैंट से भाजपा विधायक एवं सोनभद्र के बसपा के पूर्व सांसद की गाड़ी का चालान किया था। इनके वाहनों पर विधायक और पूर्व सांसद लिखा हुआ था। इन्हें बताया गया कि यह आचार संहिता का उल्लंघन है। जानकारों की मानें तो ये आचार संहिता नहीं, बल्कि मोटर व्हेकिल एक्ट और हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। पुलिस अधिकारी और मजिस्ट्रेट की टीमें रोजाना विधायक, सांसद, पूर्व विधायक एवं पार्टी संगठन का पदनाम लिखवाकर चल रहे वाहनों का चालान कर रही हैं। अब तक 40 वाहनों का चालान किया गया है मगर अफसरों के एक भी वाहन का चालान नहीं हुआ। बुधवार को पड़ताल करने पर एडीएम सिटी, एडीएम वित्त एवं राजस्व, सीएमओ और एसपी प्रोटोकाल के वाहनों पर उनका पदनाम लिखा मिला। अलबत्ता, एसपी यातायात की बोलेरो गाड़ी पर उनका पदनाम नहीं था।