हंस तीर्थ कुंड को पाटकर बन गया बीएसएनएल का दफ्तर और लग गया टॉवर।
आबादी के विस्तार के क्रम में शहर के बीच स्थित हंस तीर्थ कुंड का वजूद मिट चुका है। हंस तीर्थ कुंड को लेकर मान्यता थी इसमें डुबकी लगाने से सात पीढ़ियां तर जाती हैं। पापों से मुक्ति और जीवन के उद्धार की महिमा से जुड़े इस हंस तीर्थ कुंड को पाट कर कब्जा कर लिया गया है।
इस कुंड पर अतिक्रमण करने में भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) भी शामिल है। लोगों ने आसपास के हिस्से को पाट कर मकान तो बनाए ही, बीएसएनएल ने अपना टावर खड़ा करने के साथ ही दफ्तर बना लिया है। हंस तीर्थ कुंड के नाम पर हर तीर्थ मोहल्ला बसा है। विशेश्वरगंज मंडी के उत्तर पीलीकोठी मार्ग पर चंद कदम जाने पर ही हंस तीर्थ है। कभी इस स्थान पर डुबकी लगाने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आते थे।
वहां आस्था का मेला लगता था। मंगलागौरी मंदिर के महंत नारायण गुरु कहते हैं कि हंस तीर्थ काशी के प्रधान जल तीर्थों में से एक था। इस कुंड में भगवान विष्णु का वास माना जाता था। वहां कभी श्रद्धालु कष्टों के निवारण और सुख-शांति के लिए डुबकी लगाते थे लेकिन अब यह कुंड अस्तित्व में नहीं रह गया है।
मौजा शहर खास आराजी नंबर 1864 के रकबा 3985 वर्ग मीटर में फैले इस कुंड का कभी विशाल दायरा था लेकिन अब नामोनिशान ढूंढना मुश्किल है। आस्था के इस केंद्र को अतीत का पन्ना बना दिया गया।
अब आने वाली पीढ़ियों को यह भी पता नहीं होगा कि वहां काशी की महिमा से जुड़ा हंस कुंड तीर्थ भी था। इस कुंड से गंगा का कनेक्शन जुड़ा था। इसी वजह से इस कुंड को पाटकर कब्जा कर लिया गया है।