काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष पर सर सुंदरलाल चिकित्सालय ने विश्वविद्यालय की उपलब्धि में एक और कड़ी जोड़ दी है। बीएचयू में अब बिना किसी टांके और निशान के दिल के छेद का आपरेशन हो सकता है। 27 जनवरी को आईएमएस बीएचयू के हृदय रोग विभाग डॉ. धमेंद्र जैन और उनकी टीम ने पहली बार बिना सर्जरी के जौनपुर की 16 वर्षीय श्वेता का सफल आपरेशन किया है।
जन्म से ही उसके दिल में छेद था। आईएमएस बीएचयू के हृदय रोग विभाग की हेड प्रो. गीता सुब्रह्मण्यम ने सोमवार को बताया कि हृदय के छेद (एट्रीयल सेप्टल डिफेक्ट) का सफल इलाज पहली बार विभाग द्वारा किया गया है। उन्होंने बताया कि बिना सर्जरी के इस इलाज में जांघ की नस के साथ कैथेटर ट्यूब से शर्ट की बटन जितना दिखने वाले उपकरण (सेप्टल ऑक्लूडर डिवाइस) को मरीज के हृदय तक पहुंचाया जाता है।
ये उपकरण छाते की तरह होता है जिसे हृदय के छेद को बंद करने के लिहाज वहां प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। इससे मरीज के दिल का छेद बंद हो जाता है। इस प्रक्रिया में महज एक घंटे लगते हैं। मरीज को उसी दिन छुट्टी भी दे दी जाती है। इस पर करीब 75 हजार रुपये का खर्च आता है। जबकि दूसरे आपरेशन में मरीज को न सिर्फ अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है बल्कि खर्च भी ज्यादा होता है। डॉ. धमेंद्र जैन ने बताया कि हृदय रोगियों में करीब 10 प्रतिशत मरीज एट्रीयल सेप्टल डिफेक्ट से पीड़ित होते हैं। अब तक ये आपरेशन केवल महानगरों में होता रहा है।