अब डॉ. मौर्य दुनिया भर के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर तमाम हानिकारक कीड़ों की महक से नेचुरल इम्युनिटी बूस्टर तैयार करने पर काम करेंगे। डॉ. मौर्य ने कहा कि यदि दवा बनाकर इनकी गंध बीजों को सूंघा दें तो वह भविष्य के किसी भी खतरे को संभाला जा सकता है। आगामी दिनों में काफी हद तक कीड़ों से नुकसान होने वाली फसलों को बचाया जा सकेगा। इसके प्रोविजनल पेटेंट के लिए आवेदन दिया जा चुका है।
मेडिकागो और अर्बिडॉप्सिस के पौधे पर रिसर्च
डॉ. अभिनव ने इस रिसर्च के लिए मेडिकागो और अर्बिडॉप्सिस का पौधा लिया था। उन्होंने कहा कि इस रिसर्च को करने में कुल पांच साल का लंबा वक्त लगा है। बीज के अंदर जींस की जांच की गई है। लेकिन अभी तक पता नहीं चली कि यह मेमोरी किस तरह विकसित हुई है।
डॉ. अभिनव मौर्य जौनपुर स्थित समसपुर गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता अवधेश मौर्य जौनपुर में अधिवक्ता और गायत्री देवी गृहिणी हैं। डॉ. अभिनव मौर्य ने कृषि विज्ञान संस्थान में (2009-13) कृषि स्नातक किया था। इसके बाद आईआईएम-अहमदाबाद गए, मगर उसी बीच अमेरिका में उन्हें रिसर्च फेलोशिप मिल गई। वहां से उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ नॉदर्न कोलेराडो और यूनिवर्सिटी ऑफ लुइसविले से रिसर्च पूरा किया।