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Varanasi News: अब 4 किलोवाट तक के मीटरों की भी होगी एमआरआई

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पूर्वांचल डिस्कॉम अब एक से चार किलोवाट भार के बिजली कनेक्शनों के मीटरों की भी एमआरआई (मीटर रीड़िंग इंस्ट्रूमेंट) कराने की तैयारी में है। इसके लिए शुरुआत में कुछ क्षेत्र विशेष के मीटर चिह्नित किए गए हैं। इससे मीटर से छेड़छाड़ कर बिजली चोरी पर अंकुश लगेगा। अभी पांच किलोवाट से अधिक भार के कनेक्शनों की एमआरआई कराई जाती है।
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मीटरों के साथ छेड़छाड़ कर बिजली चोरी के मामले बढ़ गए हैं। बिजली चोरी के मद में बकाया लगभग 100 करोड़ रुपये बिजली निगम वसूल भी नहीं पाया है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक हजारों बिजली चोरी के मामले डिस्कॉम के लिए सिरदर्द बने हैं। पिछले दिनों बनारस शहर के सोनिया पर मीटर के समीप स्विच लगाकर पांच किलोवाट की बिजली चोरी का मामला सामने आया था। मीटर की एमआरआई से ही इस मामले का पता चला था। कई बार बिजली मीटर लगाने वाला कर्मी भी मीटर के साथ छेड़छाड़ कर देते हैं, जिससे उपभोक्ता की बिल रीडिंग पर असर पड़ जाता है। ऐसे मामले सामने आने के बाद बिजली निगम ने 1 से 4 किलोवाट तक के मीटरों की एमआरआई कराने का मन बना लिया है। इस श्रेणी में सबसे ज्यादा घरेलू बिजली कनेक्शनधारक हैं।
अब तक 5 किलोवाट से ऊपर की होती है एमआरआई
अब तक पांच किलोवाट या उससे ऊपर के भार वाले कनेक्शनों के मीटरों की एमआरआई कराई जाती है। पहले 10 किलोवाट और उससे अधिक के मीटरों की एमआरआई कराई जाती थी। मगर, दो महीने पूर्व 5 से 9 किलोवाट के मीटरों को भी एमआरआई की श्रेणी में ला दिया गया। सोनिया की बिजली चोरी मामले का खुलासा भी इसीलिए हो पाया।
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यह होती है एमआरआई
एमआरआई वाले मीटरों में चिप की शक्ल में एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगा दिया जाता है। इससे मीटर का पूरा डेटा एक फाइल में एकत्र होता रहता है। इसमें मीटर के साथ की जाने वाली छेड़छाड़ या मीटर लगाने वाली एजेंसी के कर्मचारी की कारस्तानी का रिकाॅर्ड भी स्टोर हो जाता है। एमआरआई के समय इंजीनियर उसी डेटा का विश्लेषण कर मीटर का पूरा ब्योरा प्राप्त कर लेता है।
बिजली निगम 1 से 4 किलोवाट के बिजली कनेक्शनों की एमआरआई की तैयारी कर रहा है। पहले कुछ चिह्नित मीटरों की एमआरआई कराई जाएगी। इसके बाद यह व्यवस्था आगे बढ़ाई जा सकती है।
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- अनिल वर्मा, अधीक्षण अभियंता
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