वाराणसी। गमे हुसैन के अंतिम साठे के जुलूस में जनसैलाब उमड़ पड़ा। अजादारों ने जंजीर और खंजर के मातम से खून का नजराना पेश किया। हर किसी की आंखे इमाम हुसैन को याद करके नम हो उठीं। रास्ते भर अलम, दुलदुल, ताबूत व अमारी की जियारत करने के लिए अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस अवसर पर कई शायरों ने कलाम भी पेश किए। इसके साथ ही दो महीने 8 दिन तक चलने वाले गमे हुसैन का समापन हो गया।
बुधवार को गमे हुसैन का अंतिम जुलूस दालमंडी पुरानी अदालत स्थित शब्बीर व सफदर के अजाखाने से उठाया गया। जुलूस के उठने के पहले मौलाना अब्बास इरशाद नकवी ने मजलिस को खिताब किया। जुलूस जैसे ही नई सड़क पहुंचा जंजीर व कमा के जोरदार मातम के साथ सैकड़ों नौजवानों नौजवानों ने लहू का नजराना पेश किया।
पितरकुंडा पर मौलाना कैसर अब्बास और नई पोखरी पर मौलाना अब्बास इरशाद ने तकरीर की। गढ़वा घाट मठ पर अजादारों का स्वागत हुआ। शहर भर की 32 अंजुमनों के लोग जुलूस में शामिल रहे। जुलूस में जियारत के लिए आसपास के जिलों के अलावा बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के जायरीन भी शामिल रहे। दरगाहे फातमान में मौलाना जहीर हैदर ने अमारियों का परिचय कराया।
ईद ए जेहरा आज
गमों के सिलसिले के समापन के बाद गुरुवार को ईद ए जेहरा मनाई जाएगी। शाम को अरबी कालेज प्रह्लाद घाट पर मौलाना शमीमुल हसन लोगों को सम्मानित करेंगे। इस दौरान महफिलों का आयोजन होगा।