डीजीपी ने बताया कि प्रदेश के 20 जिलों में करीब ढाई माह पहले "रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन" योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत तकनीक की मदद से यातायात संबंधी समस्याओं का विश्लेषण किया जा रहा है। इसके लिए गूगल से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे ट्रैफिक प्रभावित मार्गों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।
उन्होंने बताया कि वाराणसी में 11 प्रमुख ट्रैफिक कॉरिडोर और मार्गों की पहचान की गई है, जहां जाम की समस्या अधिक रहती है। इसी प्रकार पूरे प्रदेश में लगभग 230 ऐसे कॉरिडोर चिह्नित किए गए हैं। इन मार्गों पर वाहनों की गति, जाम की स्थिति, अधिकतम, न्यूनतम और औसत यात्रा समय का डेटा लगातार एकत्र किया जा रहा है। पिछले एक सप्ताह, दो सप्ताह और एक माह के आंकड़ों का विश्लेषण कर यातायात सुधार की रणनीति बनाई जा रही है।
डीजीपी ने कहा कि तकनीक आधारित इस व्यवस्था से ट्रैफिक प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा तथा लोगों को जाम से राहत मिलेगी। इस दौरान पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल और एडीजी जोन पीयूष मोर्डिया भी उपस्थित रहे।