काशी विश्वनाथ मंदिर में नियमों को दरकिनार कर महत्वपूर्ण पर नियुक्ति करने का मामला चर्चा का विषय बन गया है। यह तैनाती किसी सेवादार या अस्थाई कर्मचारी के पद पर नहीं, बल्कि अफसर के रूप में की गई है।
वह भी तब जबकि न पद सृजित हुआ और न ही इसके लिए कोई प्रस्ताव ही शासन को भेजा गया था। बावजूद इसके मंदिर में विशेष कार्याधिकारी की तैनाती कर दी गई है।
प्रभारी मुख्य कार्यपालक अधिकारी एमपी सिंह ने फिलहाल इस तरह के आदेश के प्रति अनभिज्ञता जताई है। उनका कहना था कि नियुक्ति पत्र की प्रति हाथ में आए बिना कुछ नहीं कहा जा सकता।
न्यास परिषद के सदस्य प्रदीप कुमार बजाज ने इस तैनाती पर उंगली उठाई है। उनका कहना है कि नियमविरुद्ध हुई इस नियुक्ति को रद्द कराने के लिए वह सोमवार को मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण से मिलेंगे।
नियमों को ताक पर रखकर ऑनलाइन प्रसाद का ठेका देने के मामले में मुंह की खा चुके धर्मार्थ कार्य विभाग ने एक बार फिर न्यास परिषद की व्यवस्था को नजरअंदाज किया है।
इस बार मंदिर में सीधे विशेष कार्याधिकारी की तैनाती की गई है। इस आशय का फैक्स जिलाधिकारी कार्यालय को शुक्रवार को ही प्राप्त हो गया लेकिन रविवार तक डाक मंदिर कार्यालय तक नहीं पहुंच सकी थी।
हालांकि कुछ अफसरों को इसकी मौखिक जानकारी दी गई है। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीएन द्विवेदी ने बताया कि ओएसडी की नियुक्ति से संबंधित आदेश डीएम कार्यालय में प्राप्त होने की जानकारी मिली है।
डीएम कार्यालय से ही उन्हें फोन पर इसकी सूचना दी गई।
उधर, इस नियुक्ति पत्र की सूचना कार्यपालक समिति के सभापति मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण के कार्यालय को भी नहीं दी गई है।
कमिश्नर ने इस तरह की जानकारी से इंकार किया। न्यास परिषद के सदस्य प्रदीप ने बताया कि ओएसडी का पद मंदिर में सृजित नहीं है।
यह नियम के विरुद्ध आदेश जारी कराया गया है। इसे रद्द कराने के लिए जरूरत पड़ेगी तो कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया जाएगा, ताकि मंदिर पर अतिरिक्त बोझ पड़ने से बचाया जा सके।