दक्षिण एशिया से जंगल की आग की गतिविधियों और प्राकृतिक धूल एरोसोल से उत्सर्जित मानवजनित एरोसोल (जैसे काले और भूरे कार्बन) के लंबी दूरी तक पंहुचने के कारण प्राचीन हिमालयी क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। इससे उच्च वर्षा की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है। हिमालय क्षेत्र की तलहटी के अलावा ब्लैक कार्बन (बीसी) के जमाव से ग्लेशियरों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने की गति तेज हो सकती है।
वैज्ञानिकों की टीम में तिब्बती पठार पृथ्वी प्रणाली, संसाधन और पर्यावरण की राज्य प्रमुख प्रयोगशाला (टीपीईएसआरई), तिब्बती पठार अनुसंधान संस्थान, चीनी विज्ञान अकादमी (सीएएस) और अंतरराष्ट्रीय सहयोगी जियोटॉप/यूनिवर्सिटी डु क्यूबेक, मॉन्ट्रियल (यूक्यूएएम), कनाडा के शोधकर्ता भी शामिल थे।