अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर निर्भया के दरिंदों को प्रतीकात्मक रूप से फांसी पर लटकाया गया। बूंदी परकोटा घाट पर लघु नाटक के माध्यम से बाबा विश्वनाथ को साक्षी मानकर चारों दरिंदों के प्रतीकात्मक पुतले को फांसी देकर लोगों ने महिलाओं के सम्मान का संकल्प लिया।
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घाट वॉक सदस्यों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम को देखने वालों की भीड़ घाट पर लगी रही। नाटक में थोड़ी देर के बहस के बाद दरिंदों को फांसी देने का फैसला जज ने सुनाया, जिसके बाद उन्हें फांसी दी गई।
जज की भूमिका में अष्टभुजा मिश्र, निर्भया के वकील के रूप में गौरव कुमार सिंह और बचाव पक्ष के वकील की भूमिका वृजेश उपाध्याय और निर्भया की मां के रूप में नीलम मौर्या ने भूमिका निभाई।
बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और घाट वॉक के कल्पनाकार प्रो. विजयनाथ मिश्रा ने कहा कि यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता वाली भोलेनाथ की नगरी में दंड का तत्काल प्रावधान है। इस दौरान लोगों ने महिलाओं को सम्मान देने का संकल्प लिया।