विद्यालय पहले ही किया गया था स्थानांतरित
गोपालनगर टाड़ी प्राथमिक विद्यालय के पूरी तरह नदी में समाहित होने से पहले ही उसे जूनियर हाईस्कूल गोपालनगर परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया था। विद्यालय में कुल चार कमरे हैं, जिनमें दो कमरों में कक्षा छह से आठ तक के छात्र पढ़ते हैं, जबकि शेष दो कमरों में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई संचालित की जा रही है। खंड शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर विद्यालय को ऐसे स्थान पर स्थानांतरित किया गया, जहां कटान प्रभावित परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
दो साल पहले उजड़े, अब फिर बेघर हुए परिवार
कटान की मार झेल रहे एक दर्जन से अधिक परिवारों ने दो वर्ष पूर्व अपना पुराना आशियाना सरयू नदी में समाने के बाद कटान स्थल से करीब एक किलोमीटर दूर नया घर बनाया था। लेकिन दो साल के भीतर ही उनके नए मकान भी नदी में समाहित होने लगे हैं। कटान पीड़ितों का कहना है कि अब उनके सामने सबसे बड़ी समस्या बसने की है। उनकी जमीन और मकान दोनों नदी में समा चुके हैं तथा पिछले पांच वर्षों में विस्थापित परिवारों को अब तक शासन की ओर से बसने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में उनके सामने या तो पुरानी रेलवे लाइन के किनारे बसने अथवा रिश्तेदारों के यहां शरण लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
आज तहसील पर होगा प्रदर्शन, आमरण अनशन की चेतावनी
सरयू नदी के कटान से त्रस्त उत्तरी दियरांचल के चार गांवों के हजारों ग्रामीण शनिवार को बैरिया तहसील पहुंचकर शासन-प्रशासन के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि कटान रोकने के प्रति प्रशासन गंभीर नहीं है और बाढ़ विभाग द्वारा पूर्व में कराए गए कार्यों में सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है। उनका कहना है कि यदि तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो धरना-प्रदर्शन के बाद आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। शिवाल मठिया निवासी ओमप्रकाश सिंह, गोपालनगर टाड़ी निवासी अर्जुन यादव, सुनील यादव, प्रदीप यादव तथा वशिष्ठ नगर निवासी राजकिशोर सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि दियरांचल के लोगों के सामने अब "करो या मरो" जैसी स्थिति बन गई है।
कटान पीड़ितों की हरसंभव मदद की जा रही : एसडीएम
उपजिलाधिकारी बैरिया शशिभूषण मिश्र ने कहा कि कटान पीड़ितों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए प्रशासन गंभीर है। प्रभावित परिवारों को तत्काल गृह अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है तथा उन्हें बसाने के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लेखपाल की रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक सप्ताह में लगभग 32 बीघा भूमि सरयू नदी में समाहित हुई है, जबकि ग्रामीण इससे कहीं अधिक नुकसान होने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्राकृतिक आपदा है और प्रशासन की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।