इसके बाद साहूपुरी स्थित सीआरपीएफ कैंप, बीएचयू कैंपस, डीरेका, संकटमोचन मंदिर, मालवीय पुल, दशाश्वमेध घाट, काशी विश्वनाथ मंदिर, कैंट रेलवे स्टेशन, 39 जीटीसी व वायुसेना चयन बोर्ड, औरंगाबाद और छितूपुर स्थित राशिद के पिता के घर उसे लेकर एनआईए की टीम गई। इन सभी स्थानों की फोटो और वीडियो राशिद आईएसआई एजेंट्स को भेजे थे।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, राशिद के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने के लिए उसकी गिरफ्तारी के दौरान बरामद मोबाइल और सिम से पर्याप्त साक्ष्य मिल गए थे। साक्ष्यों और तथ्यों की सिरे से तस्दीक करने के लिए एनआईए की टीम राशिद को लेकर चंदौली और वाराणसी गई थी। बताया जा रहा है कि जो साक्ष्य और तथ्य राशिद के खिलाफ मिले हैं, वह उसे कठोर सजा दिलाने के लिए पर्याप्त साबित होंगे।
आंखों से पूछती रही मां, ऐसा क्यों किया
राशिद को एनआईए जब रविवार को मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के चौरहट गांव स्थित उसके घर लेकर पहुंची तो मां, नाना व भाई भौचक रह गए। मां चाह कर भी बेटे का हाल नहीं पूछ सकी, लेकिन मां की निगाहें अपने बेटे राशिद से सवाल कर रही थीं कि आखिर उसने ऐसा क्यों किया? राशिद की हरकतों पर उसके नाना भी दुखी दिखाई दिए।
यह था पूरा मामला
राशिद ने गिरफ्तारी के दौरान एटीएस को बताया था कि वह वर्ष 2017 और 2018 में अपनी मौसी के घर कराची गया था। उसी दौरान मौसेरे भाई के माध्यम से आईएसआई के दो एजेंट के संपर्क में आया। पैसे और महंगे उपहारों के लालच में आकर वह आईएसआई एजेंट को मार्च 2019 से प्रदेश और देश के संवेदनशील स्थानों की फोटो और वीडियो भेजने लगा। आईएसआई एजेंट ने उसे प्रशिक्षित किया था कि प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्र और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों में जाकर चोरीछिपे कैसे फोटो खींचना है और वीडियो बनाना है।