आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) के एक अफसर ने बताया कि सीपीआई (माओवादी) का फोकस विशेष रूप से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के स्नातक के छात्र-छात्राओं पर है। इसके लिए विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्र संगठन तैयार कर उन्हें शोषक और शोषित की मनमानी परिभाषा बताते हुए व्यवस्था के विरुद्ध उकसाया जाता है।
इसके अलावा अब जंगल का इलाका छोड़ कर पूर्वांचल के खेतिहर मजदूर, बुनकर मजदूर और दिहाड़ी मजदूर के बीच भी प्रतिबंधित संगठन अपने कैडर के विस्तार के लिए जोर-शोर से प्रयासरत है। इनमें से ज्यादातर ऐसे लोग हैं बिहार और झारखंड के मतदाता हैं और कामकाज के सिलसिले में वाराणसी सहित पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में आते-जाते रहते हैं।
एनआईए और एटीएस का शिकंजा कसता देख सीपीआई (माओवादी) का भूमिगत कैडर तकनीक के साथ खुद को अपडेट कर रहा है। एटीएस के एक अफसर के अनुसार गिरफ्तारी के डर से प्रतिबंधित संगठन के लोग एक-दूसरे के मोबाइल पर सामान्य या व्हाट्सएप कॉल नहीं करते हैं। वह बातचीत के लिए अलग-अलग किस्म के एप्लीकेशन का इस्तेमाल करते हैं। व्हाट्स एप वगैरह के माध्यम से संदेश का जो आदान-प्रदान होता है, उसमें बातचीत के लिए निर्धारित कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जाता है।