जिलाधिकारी ने एनजीटी के समक्ष दाखिल 12 अगस्त के अपने शपथ पत्र में उल्लेख किया है कि राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान एवं सिंचाई विभाग, बंधी प्रखंड वाराणसी के बीच पिछले वर्ष 7 दिसंबर को असि व वरुणा नदी के सीमांकन के लिए समझौता किया गया है।
जिलाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में यह उल्लेख किया है कि असि नदी आठ किलोमीटर तथा वरुणा नदी 54 किलोमीटर तक की दूरी वाराणसी की सीमा में तय करती है। अधिवक्ता सौरभ तिवारी की ओर से दायर याचिका पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण प्रधान पीठ नई दिल्ली के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव एवं विशेषज्ञ सदस्य डाॅ. ए. सेंथिल वेल कि पीठ सुनवाई कर रही है। जिलाधिकारी ने असि व वरुणा नदी को अतिक्रमण मुक्त करने एवं जीर्णोद्धार के लिए कुल 124 पृष्ठ की रिपोर्ट दाखिल की है।
बरसाती नालों को टैप किए जाने पर जताई चिंता
एनजीटी ने अपने आदेश में चिंता प्रकट की है कि नालों के प्रवाह को एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की ओर मोड़ने के लिए बरसाती नालों को टैप किया जा रहा है और एसटीपी के साथ 100 प्रतिशत घरेलू सीवेज को सीधे जोड़ने की कोई योजना नहीं है।
एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि बरसाती नाले में अवैध रूप से बह रहे अशोधित जल को एसटीपी से जोड़ने से केवल अल्पकालिक समाधान हो सकता है, लेकिन बारिश के दौरान एसटीपी में पानी भरने से हाइड्रोलिक गड़बड़ी होने से अशोधित सीवेज नदी में प्रवाह होता है।
एनजीटी ने 2021 में जीर्णोद्धार के लिए दिया था अंतिम आदेश
एनजीटी ने 23 नवंबर 2021 को असि और वरुणा नदी के जीर्णोद्धार के लिए विस्तृत अंतिम आदेश पारित किया था। इसका अनुपालन न होने के कारण अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने एनजीटी के समक्ष अनुपालन/ निष्पादन याचिका दाखिल की है। एनजीटी चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव एवं विशेषज्ञ डाॅ. ए. सेंथिल वेल की पीठ इस मामले कि सुनवाई कर रही है।