वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में नए साल का आगाज गुरुवार की सुबह मंदिरों, गुरुद्वारों और चर्चों में प्रेम, शांति का संदेश देने के साथ हुआ। गंगा तटों पर भोर से ही उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए लोग खड़े रहे लेकिन बादलों के चलते पूरब दिशा में
लाली नहीं छा सकी। नए साल के स्वागत का सिलसिला गंगा आरती से शुरू हुआ। बाबा विश्वनाथ के दरबार समेत अन्य मंदिरों में रुद्राभिषेक, गुरुद्वारों में शबद-कीर्तन और चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं हुईं। भगवान गौतम बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ हो या महामना की कर्मस्थली
बीएचयू, हर जगह युवाओं की टोलियां रंग-बिरंगे फूलों और गुब्बारों के साथ खुशी का इजहार करती नजर आईं। नई स्फूर्ति और प्रगति के सपनों के साथ नए साल के पथ पर बढ़ने का संकल्प लिया गया।
होटलों, क्लबों में रात भर चले जश्न के बाद घाटों पर लोगों को भोर से ही पौ फटने का इंतजार था। दशाश्वमेध घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट, अहिल्याबाई घाट पर नए साल के स्वागत के लिए सीढि़यों मढि़यों पर भीड़ थी। दरभंगा घाट पर बुजुर्गों की टोली राम के आदर्शों की कथा दोहरा रही थी तो मढि़यों पर
भजन हो रहा था। युवा जोड़े घाटों पर एक-दूसरे को फूलों का गुलदस्ता देकर नए साल के आगमन की खुशियां बांटते रहे। कोहरे की धुंध और बादलों के चलते दिन भर सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट पर सुबह की आरती से नए साल का स्वागत किया गया। गंगा की मध्य धारा पर गुब्बारों, फूलों से सजी हुई नावों पर युवाओं के समूह नए साल के जश्न में डूबे नजर आए। चाय-पान की
दुकानों से लेकर अडि़यों तक नए साल के स्वागत का सिलसिला चलता रहा। बाबा विश्वनाथ के मंदिर में गुरुवार को लगभग एक लाख लोगों ने मत्था टेका। वहीं संकट मोचन, बाबा काल भैरव और दुर्गा माता के दरबार में भी साल के पहले दिन भक्तों की लंबी कतार लगी रही। बृहस्पतिवार का दिन होने के कारण दशाश्वमेध घाट स्थित बृहस्पतीश्वर मंदिर में भी भक्तों का तांता लगा रहा।