शिकायतकर्ताओं का आरोप होता है कि उनके दर्ज मुकदमे में धाराओं में कमी कर दी गई है या फिर अभियुक्तों की संख्या में परिवर्तन कर दिया गया है। उच्चाधिकारी जब संबंधित पर्यवेक्षणीय अधिकारी से पूछताछ होती है तो उक्त प्रकरण में पर्यवेक्षण अधिकारी अनभिज्ञता जाहिर करते हुए अपनी जिम्मेदारियों से किनारा कर लेते हैं।
पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने बताया कि पुलिस महानिदेशक लखनऊ की पहल पर अपर पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवाओं की ओर से ऐसी व्यवस्था शुरू की जा रही है, जिसमें धाराओं की कमी या अभियुक्तों की संख्या में परिवर्तन पर संबंधित पर्यवेक्षणीय अधिकारी की सीयूजी नंबर पर एसएमएस Dलर्ट जनरेट होगा, जिससे कि उक्त पर्यवेक्षण अधिकारी को भी पता चल सकेगा कि किस अभियोग में धारा और अभियुक्तों की संख्या में परिवर्तन विवेचक की ओर से किया गया है। एडीजी क्राइम की ओर से यह सर्कुलर सभी जिलों में भेजा गया है।