नेशनल स्कूल ऑफ ड्रॉमा (एनएसडी) के नए स्टूडियो ‘शाकुंतल’ का नागरी नाटक मंडली में मंगलवार को शुभारंभ हुआ। इस दौरान प्रशिक्षु युवाओं ने नाट्यमंचन कर सभी का दिल जीत लिया। इसी के साथ वाराणसी में ‘रंगदूत’ को तैयार करने की योजना पर काम शुरू हो गया।
सेंटर निदेशक राम जी बाली ने बताया कि अगस्त से एनएसडी का चौथा सेंटर वाराणसी में काम करना शुरू कर दिया। इसमें देशभर से चुने 20 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिनमें तीन लोग वाराणसी के भी है। उन्होंने बताया कि हमारा उद्देश्य ऐसे रंगदूत तैयार करना है जिनमें काशी की कला व संस्कृत की छाप हो।
बताया कि शाकुंतल में न केवल एनएसडी के प्रशिक्षु बल्कि बाहर के नाट्यकर्मी भी अपनी कला का प्रदर्शन कर सकेंगे। सेंटर निदेशक ने बताया कि मध्यप्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़ के प्रशिक्षु यहां हैं। उन्हें साढ़े चार हजार रुपये स्कॉलरशिप दिया जा रहा है। जल्द ही हरिश्चंद्र घाट पर एक नाटक का मंचन करने की तैयारी है। इसके लिए प्रशासन से पत्राचार किया जाएगा।
नाट्य मंचन में दिखी प्रतिभा
एनएसडी सेंटर के प्रशिक्षुओं ने ‘भगवद् अजुकम’ नाटक का मंचन किया गया। इसमें भौतिकता में फंसे शिष्य को आध्यात्मिकता की ओर ले जाने के गुरु के प्रयास को बखूबी दर्शाया गया। इस शिष्य के मॉडर्न सोच व गुरु की परंपरावादी सोच के बीच टकराव आदि का भावपूर्ण मंचन किया गया। हर कोई नाट्यमंचन को सराहता नजर आया।