यह नया घाट केवल पत्थर की संरचना मात्र नहीं होगा, बल्कि सूचनाओं का एक जीवंत केंद्र बनेगा। विभाग की योजना के अनुसार, घाट की दीवारों पर काशी के गौरवशाली इतिहास को दर्शाने वाले भव्य म्यूरल (भित्ति चित्र) उकेरे जाएंगे। पर्यटकों की सुविधा के लिए आधुनिक क्यूआर कोड लगाए जाएंगे, जिन्हें स्कैन करते ही पर्यटक उस स्थान और काशी के इतिहास से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। यह जानकारी ऑफलाइन मोड में होगी, ताकि नेटवर्क की समस्या होने पर भी ज्ञान की गंगा बहती रहे। पूरे क्षेत्र में साइनेज लगाए जाएंगे ताकि पर्यटकों को भ्रमण में आसानी हो।
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पर्यटन के इस नए मॉडल में जल परिवहन पर भी विशेष जोर दिया गया है। नए घाट के निर्माण के साथ ही पर्यटकों को गंगा के उस पार चंदौली क्षेत्र में अवधूत भगवान राम समाधि स्थल के दर्शन कराने की भी तैयारी है। इसके लिए विशेष वॉटर ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था की जाएगी। इससे काशी के घाटों पर भीड़ का दबाव कम होने के साथ ही गंगा पार के आध्यात्मिक स्थलों तक भी पर्यटकों की पहुंच बढ़ेगी।
काशी की प्राचीनता और आधुनिकता के संगम को विस्तार देने के लिए नमो घाट और आदि केशव घाट के बीच एक नया ''मॉडल घाट'' प्रस्तावित है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यटकों को काशी के सबसे प्राचीन ''विष्णु तीर्थ'' यानी आदि केशव घाट तक पहुंचाना है। यह घाट न केवल स्थापत्य का बेजोड़ नमूना होगा, बल्कि क्यूआर कोड और म्यूरल्स से काशी के इतिहास का डिजिटल झरोखा भी बनेगा। -दिनेश कुमार, संयुक्त निदेशक, पर्यटन विभाग