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आजादी का पैगाम लेकर आए थे नेहरू

Fri, 11 Nov 2016 02:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
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देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू आजादी का पहला पैगाम लेकर खुद काशी हिंदू विश्वविद्यालय आए थे। सितंबर, 1946 में ब्रिटिश हुकूमत ने जब भारत को आजाद करने की घोषणा की, बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू पहले शख्स थे, जिन्होंने महामना को ये संदेश सुनाया। उस समय महामना का स्वास्थ्य काफी गिर चुका था। वह चलने-फिरने में भी असमर्थ थे लेकिन जैसे ही नेहरू ने हिंदुस्तान की आजादी की खबर सुनाई, वह उठकर बैठ गए। महामना के पहले वाक्य थे, ‘...सब मिल बोला एक आवाज, अपने देश में अपना राज’।


महामना मालवीय फाउंडेशन के महासचिव डॉ. उमेश दत्त तिवारी बताते हैं कि भारत की आजादी में दोनों ही महानुभावों का बड़ा योगदान रहा है लेकिन आपको जानकर आश्चर्य ये होगा कि महामना ने चाचा नेहरू को अपनी गोद में खिलाया था। बताया कि 1946 से पहले पंडित नेहरू जनवरी, 1942 में बीएचयू के रजत जयंती समारोह में भी आए थे। एंफीथिएटर ग्राउंड में हुए इस समारोह की तैयारियों में खुद नेहरू जी भी लगे थे। इसके बाद 1961 में महामना के जन्मशती समारोह में उनका बीएचयू आना हुआ था।
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पंडित जवाहर लाल नेहरू और महामना के बीच बहुत ही आत्मीय रिश्ता था। इससे अलग दोनों के विचार भी समान थे। जैसे, चाचा नेहरू का हमेशा बच्चों और उनकी पढ़ाई से लगाव रहा, महामना की भी सोच थी कि राष्ट्र निर्माण में बच्चों के लिए गुणवत्तापरक शिक्षा बेहद जरूरी है। तभी तो उन्होंने इकलौते ऐसे विश्वविद्यालय की स्थापना की, जहां नर्सरी से लेकर पीएचडी तक की पढ़ाई होती है। सेंट्रल हिंदू ब्वायज स्कूल, सेंट्रल हिंदू गर्ल्स स्कूल, रणवीर संस्कृत विद्यालय, मालवीय शिशु विहार समेत केंद्रीय विद्यालय बीएचयू। खास यह कि सेंट्रल हिंदू स्कूल से ही बीएचयू के अंकुरण हुआ और बीएचयू की पढ़ाई यहीं से शुरू हुई थी। बीएचयू से पहले 1889 में सेंट्रल हिंदू ब्वायज और 1904 में सेंट्रल हिंदू गर्ल्स स्कूल की स्थापना हो चुकी थी।
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