बुर्कानशीं बाला, हाथ में आरती की थाली और जुबां पर भगवान श्रीराम की आरती...। शु्कवार को हुकुलगंज स्थित विशाल भारत संस्थान परिसर में भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव नाजनीन अंसारी ने 50 से अधिक मुस्लिम ख्बातीन संग पूरी अकीदत के साथ मनाया। आरती में संग उनके साथ वे मुस्लिम महिलाएं थीं, जो समझ चुकी हैं कि किसी भी धर्म की इज्जत करना ही हमारा असल मजहब है।
बता दें कि साल 2006 में जब संकट मोचन मंदिर में बम ब्लास्ट हुआ था, उस वक्त कुछ मुस्लिम महिलाओं के साथ बिना किसी खौफ के नाजनीन ने वहां जाकर हनुमान चालीसा का पाठ किया था। कोशिश थी कि धर्म के नाम होने वाली ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों को आईना दिखा सकें।
धीरी-धीरे उनका हौसला बढ़ा और हनुमान चालीसा का उर्दू में अनुवाद किया। मुस्लिम महिला फाउंडेशन नाम से संस्था बना ली और अपनी कौम की महिलाओं को एकजुट करने लगीं। दुर्गा चालीसा का उर्दू में अनुवाद किया। श्रीराम आरती लिखी। इस वक्त रामचरित मानस का अनुवाद कर रही हैं। नाजनीन को शुरुआत में जिल्लत भी झेलनी पड़ी और फतवे भी जारी हुए। मुस्लिम कट्टरपंथियों ने डराया, धमकाया भी। आतंकी सरगना हाफिज सईद ने भी धमकी दी लेकिन हौसला डिगा नहीं। इसी साल 22 फरवरी को राष्ट्रपति ने उन्हें सम्मानित किया । बतौर सम्मान उन्हें हनुमान चालीसा फेम का तमगा मिला। आजकल वह मुस्लिम महिलाओं की तालीम, तरक्की और तलाक जैसे मुद्दों पर काम कर रही हैं।