एडीसीपी वैभव बांगर के साथ सेठ एमआर जैपुरिया स्कूल के विद्यार्थी।
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छात्र प्रभाल दूबे ने पूछा कि क्या कभी ऐसा समय आया जब अंकों ने अपेक्षाओं को पूरा नहीं किया? एडीसीपी गोमती जोन ने बताया कि उनके जीवन में ऐसे कई क्षण आए जब परिणाम उनकी उम्मीदों के विपरीत रहे। ऐसे समय में उन्होंने हमेशा अपनी आंतरिक क्षमताओं पर भरोसा रखा और यह सीखा कि अंक केवल उनकी कहानी का एक हिस्सा हैं, पूरी कहानी नहीं।
छात्रा राशि ने पूछा कि क्या उन्होंने कभी महसूस किया कि उनकी पहचान केवल अंकों से आंकी जा रही है? एडीसीपी ने कहा कि हां, ऐसा दौर आया था। लेकिन, उस स्थिति से बाहर निकलना ही वास्तविक विकास है।
सेठ एमआर जैपुरिया स्कूल के विद्यार्थी।
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छात्रा ऋद्धिमा सिंह ने पूछा कि क्या कभी उन्हें अप्रत्याशित रास्तों से सफलता मिली? जवाब में उन्होंने कहा कि कई बार अवसर किताबों से बाहर मिलते हैं। उदाहरण देकर बताया कि बिना बड़ी परीक्षा या अच्छे अंकों के, उनकी ईमानदारी और टीमवर्क ने उन्हें एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिलाई।
छात्रा रईसा सिंह के असफलता से जुड़े प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि कम अंक या असफलता ने उनके भीतर एक लचीलापन पैदा किया। सीख दी कि हार से शर्मिंदा नहीं होना चाहिए, बल्कि उससे सीखकर आगे बढ़ना चाहिए। छात्रा प्रत्यूषा उपाध्याय के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सफलता वह है जो उन्हें दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर प्रदान करे।
निदेशक अनिल जाजोदिया ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों को प्रेरणा मिलती है। इस तरह के कार्यक्रम समय-समय पर विद्यालयों में होने चाहिए। प्रधानाचार्य सुधा सिंह माैजूद रहीं।