भीषण गर्मी के बीच भी बच्चों और काउंसलर के बीच संवाद का क्रम नहीं टूटा। डॉ. लक्ष्मण ने बच्चों को 10 मिनट के लिए मेडिटेशन कराकर उनको शांतचित्त करने का प्रयास किया। उन्हें कहा कि भावनाओं और विचारों से फैसला कभी न लें। हमेशा फैक्ट के साथ ही काम करिए। यदि आप भावनाओं, विचारों के साथ फैसले लेंगे तो वह अधिकतर नकारात्मक होगा। इस स्थिति में आप पीछे की बातों को सोचकर राेएंगे और भविष्य का सोचकर डरेंगे।
आप विचारों से सवाल करिए और उत्तर मिल जाए तो फिर उसे ठीक करने के लिए तथ्यात्मक समाधान खोजें। यदि आपके किसी एक विषय में कम नंबर आने की वजह से टॉप करने से रह गए हैं तो फिर उस विषय का हर एक पहलु स्पष्ट करिए। कार्यक्रम के दौरान डॉ. लक्ष्मण को स्मृति चिह्न और किताब देकर सम्मानित किया गया।