काशी विश्वनाथ मंदिर के शयन आरती के दर्शन
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इस दिवाली हम पहली बार बता रहे हैं कि आपके आराध्य देवी-देवता नवरत्नों की माला पहनते हैं। कान में हीरे का झुमका रहता है, जो अंधेर में चमक बिखेरता है। काशीपुराधिपति को अन्न-धन की भिक्षा देने वाली मां अन्नपूर्णा का स्वर्णमयी स्वरूप भी निराला है। स्वर्णिम स्वरूप वाली माता की प्रतिमा माणिक्य के गजफूल पर विराजमान है। गले में नवरत्नों का हार शोभा बढ़ा रहा है। माता के दर्शन करने वाले भक्त तो उनकी स्वर्णिम आभा के आगे सुख और सौभाग्य की कामना से हाजिरी लगाते हैं।
मंदिर के महंत शंकर पुरी ने बताया कि काशीपुराधीश्वरी स्वर्णमयी अन्नपूर्णा का हीरे और नवरत्नों की माला से शृंगार किया गया है। माता के आभूषण डेढ़ सौ साल से अधिक पुराने हैं। माता के गले में जो नवरत्नों का हार है, उसमें माणिक्य, हीरा, पन्ना, नीलम, मोती, मूंगा, पुखराज, लहसुनिया और गोमेद जड़ा गया है। माता के कान में हकीक और हीरे का झुमका है। मां की नाक की नथनी हीरा जड़ित हैं। हाथ में नवरत्न के कंगन हैं। माता के सिर का मुकुट स्वर्ण का ,है जिसमें नवरत्न जड़े गए हैं।