इंटर के बाद बीएचयू संस्कृत विद्या धर्म संस्थान में दाखिला हुआ। लेकिन साल 2013 में कॉलेज की फीस देने के लिए राजा के पास पैसे नहीं थे, पैसे की व्यवस्था न होने पर आखिरी में उन्होंने मां को फोन किया। बेटे की फीस देने के लिए मां ने पति की दी हुई आखिरी निशानी भी बेच दी। 2014-15 में बीएचयू में टॉप करने के पहले 2013 में उन्होंने जेआरएफ भी क्वालीफाई कर लिया था।
संघर्षों से लड़कर राजा अब न सिर्फ अपना कॅरियर बना रहे हैं, बल्कि दूसरों का भविष्य भी संवार रहे हैं। राजा कहते हैं कि नेट जेआरएफ की तैयारी में उन्हें कोई मदद नहीं मिली। इसलिए अपने जैसे छात्रों की मदद को खुद आगे आए। बीएचयू परिसर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के पास पेड़ के नीचे 2014 में 12 बच्चों के साथ नेट और जेआरएफ की मुफ्त कोचिंग देना शुरू किया।
छह सालों में अब तक वह 800 छात्रों को नेट जेआरएफ क्वालीफाई करने में मदद कर चुके हैं। उनकी नि:शुल्क कोचिंग के लिए 18 राज्यों से 4000 छात्र आवेदन करते हैं। वर्तमान में राजा ग्रह गणना के लिए प्रोग्राम और सॉफ्टवेयर के विकास विषय पर शोध कर रहे हैं। इसी क्रम में डैड फैलोशिप के तहत जर्मनी में शोध के लिए बुलाया गया था।