वाराणसी के टाउन हॉल मैदान में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (नेशनल बुक ट्रस्ट) और बीएचयू के संयुक्त तत्वावधान में नौ दिवसीय राष्ट्रीय संस्कृत पुस्तक मेला शनिवार से शुरू हो गया। राज्यपाल राम नाईक ने मेले का उद्घाटन किया और स्टॉलों पर लगी पुस्तकों का अवलोकन किया।
बतौर मुख्य अतिथि उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल भाषा ही नहीं, भारतीय संस्कृति की आत्मा है। इसके प्रचार-प्रसार और संवर्द्धन की जरूरत है।
टाउनहॉल मैदान में 17 सितंबर तक चलने वाले मेले में राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत दुनिया की सबसे पुरातन भाषा है। यह पुस्तक मेला लोगों को विचारों और भाषाओं से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि 34 भाषाओं में पुस्तकों का प्रकाशन करने वाले न्यास ने पहली बार संस्कृत में पुस्तक का प्रकाशन किया।
इस दौरान राज्यपाल ने न्यास द्वारा महात्मा गांधी के विचारों पर आधारित संस्कृत की पहली पुस्तक ‘गांधी तत्व सत्कर्म’ का विमोचन किया। न्यास के अध्यक्ष डॉ. बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि इस मेले में डेढ़ दर्जन से अधिक संस्कृत के प्रकाशक हैं।
खास तौर पर संस्कृत भाषा की पुस्तकों के प्रकाशन के लिए एक सलाहकार समिति बनाई गई है, जिसकी पहली बैठक काशी में होगी। बीएचयू के कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने संस्कृत भाषा और साहित्य की मौजूदा वक्त में जरूरत पर प्रकाश डाला।
डॉ. सत्यव्रत त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत की पुस्तकों के प्रति लोगों को रुझान बढ़ता जा रहा है, इसे बरकरार रखना होगा। पुस्तक मेले के उद्घाटन के दौरान काशी विद्यापीठ के कुलपति डॉ. पी. नाग, संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यदुनाथ प्रसाद दूबे, राधेश्याम खेमका, डॉ. रीता चौधरी सहित तमाम विद्वतजन, साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।