बिना पुष्टि दवा शुरू करने से साइडिफेक्ट
प्रो. मनोज पांडेय का कहना है कि कैंसर की पुष्टि के लिए बायोप्सी जरूरी होती है। भ्रांति है कि इसमें शरीर का भाग काट लिया जाता है। यह जानना बहुत जरूरी है कि मरीज की बायोप्सी (शरीर से ऊतक का एक छोटा टुकड़ा जांच के लिए निकालना) होती है। बिना कैंसर की पुष्टि के दवा करने से साइड इफेक्ट और खर्च झेलना पड़ सकता है। बायोप्सी एक आवश्यक जांच है और इसे करने से शरीर में कैंसर फैलता नहीं है।
चार हफ्ते में न भरें घाव तो कैंसर, उम्र बढ़ने पर खतरा अधिक
ज्यादातर तंबाकू और शराब के सेवन से कैंसर होता है, लेकिन कैंसर जीन में म्युटेशन से भी हो सकता है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को सकता है। उम्र बढ़ने के साथ साथ कैंसर की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। प्रो. मनोज के अनुसार शरीर कमजोर होने लगता है और म्यूटेशंस को रिपेयर नहीं कर पाता है। कोई भी घाव जो 4 हफ्ते में न भरे या कोई भी गांठ जो कम न हो तो यह कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।
जागरूकता के लिए यह भी जानना जरूरी
- कोई भी सर्जन कैंसर की सर्जरी नहीं कर सकता है। विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है। मेडिकल में एमएस की डिग्री के बाद तीन साल कैंसर सर्जरी में एमसीएच करना होता है।
- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान) के तहत कैंसर का इलाज निशुल्क होता है।
- जिनके पास ये कार्ड नहीं होता है, वह प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री से अनुदान की अपील कर सकते हैं।
- कैंसर के मरीज को घर का बना खाना चाहिए। कुछ विशेष खाने की जरूरत नहीं है। खाने में प्रोटीन की मात्रा बढ़ानी चाहिए। फलों और सब्जियों का सेवन जरूरी है।