प्रह्लाद ने अपने पिता के अत्याचारपूर्ण शासन को समाप्त कर एक धर्मपरायण और उदार राजा के रूप में शासन शुरू किया। उन्होंने प्रजा को विष्णु भक्ति और नैतिकता की राह दिखाई। इसके बाद दशावतार की झांकी सजाई गई। श्रीहरि विष्णु के अन्य अवतारों की झांकी के भक्तों ने दर्शन किए।
नृसिंह अवतार, वराह के अलावा कूर्म अवतार (कच्छप), मत्स्य अवतार, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, मोहिनी और कल्कि अवतार की झांकी सजाई गई। रामायणियों ने प्रभु के अवतारों के प्रसंगों का वर्णन किया। आरती के साथ लीला को विराम दिया गया।
प्रमुख पात्रों में देवराज त्रिपाठी, रुद्रकांत पांडेय, व्यास शशांक त्रिपाठी, रामायणी में पद्म साहनी, सुरेंद्र गुप्ता, राजकुमार त्रिपाठी के अलावा लीला के नेपथ्य में शुद्धू साहनी, लक्ष्मीनारायण पांडेय, मोहित उपाध्याय, विकास, दीप साहनी, भैरव साहनी, अशोक आदि शामिल रहे।