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पीएम मोदी के आदर्श गांव : वादे और हकीकत, सीएम योगी करेंगे दौरा

Fri, 30 Jun 2017 06:06 PM IST
amarujala.com, written by पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी
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pm modi jayapur - फोटो : अमर उजाला
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सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र के आराजीलाइन विकास खंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांसद आदर्श गांव जयापुर और नागेपुर की तस्वीर जिले के अन्य गांवों के मुकाबले काफी कुछ बदल चुकी है। दोनों गांव की मुख्य सड़कें तो दुरुस्त और साफ-सुथरी हैं।
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हां, पेयजल आपूर्ति, जल निकासी, अस्पताल, हाईस्कूल व इंटर कॉलेज, खेल मैदान और बदहाल गलियों के मामले में यहां के हालात कमोवेश अन्य गांवों जैसे ही हैं। इन दिनों दोनों गांव के लोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन की जानकारी से उत्साहित हैं।

रोजी-रोटी के इंतजामों से लेकर विकास की नई बयार शुरू होने को लेकर उनकी उम्मीदें उफान पर हैं। दरअसल, इन दोनों गांवों में कोई मुख्यमंत्री पहली बार आएगा। गुरुवार को इन दोनों गांवों का जायजा लिया है हमारे संवाददाता पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने...।
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जयापुर पहला आदर्श गांव - जनसंख्या: 4200 - सात नवंबर, 2014: पीएम मोदी ने गोद लिया - खासियत: प्राथमिक पाठशाला, दो बैंकोें की शाखाएं, पोस्ट आफिस, बस स्टैंड, महिलाओं के लिए सिलाई और चरखा केंद्र, वनवासियों के लिए अटल घर, बच्चों के लिए नंद घर, सोलर स्ट्रीट लाइट, सोलर प्लांट से घरों को विद्युत आपूर्ति, दो नलकूप से 350 परिवारों के लिए जलापूर्ति की व्यवस्था। कन्या विद्यालय बनकर तैयार है।

महिलाएं आत्मनिर्भर होने लगीं, युवाओं का भी हो भला

पीएम मोदी के आदर्श गांव जयापुर का अटल नगर - फोटो : अमर उजाला
तीन साल पहले तक जयापुर गांव को जाने वाला रास्ता ऊबड़-खाबड़ था मगर अब सूरत बदल चुकी है। गांव में संचालित सिलाई और चरखा केंद्र के माध्यम से 85 महिलाओं के लिए रोजगार की व्यवस्था की गई है। युवतियां ब्यूटीशियन इत्यादि के कोर्स करके खुद की बेहतरी के लिए लगी हुई हैं।

फिलहाल यह केंद्र कन्या विद्यालय के प्रांगण में छोटी सी जगह में चल रहा है। केंद्र संचालिका अमृता राय कहती हैं कि ज्यादा महिलाओं को लाभान्वित करने के लिए अलग से भवन बनाने की जरूरत है।

राजातालाब-जक्खिनी मार्ग पर स्थित गांव के प्रवेश द्वार के समीप पान की दुकान लगाने वाले बुजुर्ग मिट्ठू राम कहते हैं कि बीते ढाई साल में इतनी गाड़ियां, नेता-मंत्री, मीडिया और अधिकारी देखे, जितनी जिंदगी के 62 साल में नहीं देखे थे।

वह मानते हैं कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश जरूर हुई लेकिन गांव के लड़कों के लिए रोजी-रोटी की मुकम्मल व्यवस्था नहीं हुई। वह तो यहां तक कहते हैं-जो काम हुए, वह कच्चे निकले, मसलन शौचालय बने मगर ज्यादातर बेकार निकले, सोलर लाइट खराब हो गईं। मोदी जी कहते हैं कि जो काम हो ठोस हो तो वह दिखना भी चाहिए ना...।

दूसरी ओर ग्राम प्रधान नारायण पटेल कहते हैं कि जल निकासी, गलियों की मरम्मत, अस्पताल और स्कूल गांव के लिए जरूरी है और व्यवस्था होनी चाहिए। शौचालय हैं। फिर भी कई लोग घर के बाहर ही जाते हैं। गहरी सांस लेते हुए पटेल कहते हैं कि ग्रामीणों ने मिली सुविधाओं को सहेज कर रखने में जागरूकता नहीं दिखाई। 135 स्ट्रीट लाइट लगी थी लेकिन 70 से ज्यादा की बैट्री चोरी हो गई। ग्रामीण सजग रहते तो ऐसा न होता।

अटल नगर जाने को न रास्ता और न बिजली की व्यवस्था जयापुर में वनवासियों को रहने के लिए 14 मकानों का अटल नगर बनवाया गया। यहां जाने के लिए मुकम्मल रास्ता नहीं है। सोलर स्ट्रीट लाइट खराब हो चुकी हैं। जित्तू वनवासी कहते हैं कि हम अभी तक परंपरागत पेशे में ही हैं। कुछ ऐसी व्यवस्था होती कि हमारी आगे की पीढ़ी पढ़-लिख कर अपना जीवन संवारती और हमें दो रोटी इज्जत के साथ कमाने का मौका मिलता।

नागेपुर में जल निकासी बड़ी समस्या, गलियों की मरम्मत जरूरी

आदर्श गांव नागेपुर में लगा वाईफाई - फोटो : अमर उजाला
नागेपुर - जनसंख्या: 4500 - पांच मार्च 2016: पीएम मोदी ने गांव को गोद लिया - खासियत: कृषक प्रशिक्षण केंद्र, बच्चों के लिए नंद घर, बस स्टैंड, नलकूप के माध्यम से गांव के कुछ लोगों को पेयजल आपूर्ति, सोलर स्ट्रीट लाइट व पक्की सड़क की व्यवस्था और महिलाओं के स्वयं सहायता समूह।

जल निकासी बड़ी समस्या, गलियों की मरम्मत जरूरी नागेपुर गांव में पंचायत भवन तो है ही नहीं। जल निकासी की समस्या विकराल है और गलियों की मरम्मत जरूरी है। यह कहना है ग्राम प्रधान पारसनाथ राजभर का। पारसनाथ ने कहा कि गांव में अस्पताल, प्राइमरी से ऊपर का स्कूल, पेयजल आपूर्ति की ठोस व्यवस्था जरूरी है। देखा जा रहा है कि कब तक सारी समस्याओं का अंत होता है और हमारा गांव हर मामले में आदर्श बनेगा।
सामुदायिक भवन केंद्र के पास रहने वाली अमरावती देवी कहती हैं कि अधिकारियों और नेताओं की आवाजाही देखकर लगता है कि हमारा गांव बदल गया है। मगर, बदलाव हमें भी तो महसूस हो। एक विकलांग बेटा है, दो अविवाहित बेटियां हैं और पति मजदूरी करते हैं।

रोजी-रोटी की पक्की व्यवस्था कराते मोदी जी तो हम सब बहुत सुकून से रहते। इसी तरह रामरक्षा फरियादी भाव में कहते हैं कि प्रधानमंत्री का गोद लिया गांव है। अन्य गांवों से हर मायने में अलग नजर आना चाहिए।
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अब शायद भाजपा की सरकार में दिन बहुरें

जयापुर में टूटा पड़ा शौचालय - फोटो : अमर उजाला
मगर, जो समस्याएं हमारे रिश्तेदारों के गांवों में हैं वो यहां भी हैं। सुविधाओं के साथ काम की व्यवस्था बहुत जरूरी है। छविनाथ कहते हैं कि गांव के लड़कों को कामकाज मिलेगा तो उनके पास चार पैसे आएंगे और जीवन स्तर में सुधार होगा। सुविधाएं तो गांव में बढ़ रही हैं मगर रोजगार की दिशा में ठोस प्रयास नहीं हो रहे हैं।

नागेपुर के अरुण कुमार सिंह कहते हैं कि पहले तो सपा की सरकार थी। अब प्रदेश में भी भाजपा की सरकार है। हम ग्रामीणों को उम्मीद है कि शायद अब दिन बहुरेंगे और गांव का हर मायने में नए सिरे से कायाकल्प होगा।

हालांकि तीन महीने हो गए नई सरकार को लेकिन कोई खास बदलाव नहीं आया। मुख्यमंत्री के आने की आहट मिलते ही अधिकारियों की दौड़-भाग फिर शुरू हो गई है।   ककरहिया जनसंख्या: लगभग 2000 2 जुलाई, 2017: प्रधानमंत्री के तीसरा संभावित आदर्श गांव के रूप में चयन की उम्मीद खासियत: जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर पटेल और राजपूत बिरादरी की बहुलता वाले इस गांव में एक प्राथमिक और एक जूनियर हाई स्कूल, नंदघर और आंगनवाड़ी केंद्र है। गांव में सीसी रोड बना हुआ है, जबकि बाहर से गांव आने वाली सड़कें भी पक्की हैं।
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