प्रारंभिक पूछताछ में प्रमोद ने बताया कि वह शहर की ही दवा मंडी से टेबलेट और सीरप खरीदा था। बरामद दवाओं को नशे के आदी लोगों को बेच कर वह पैसा कमाता है। फिलहाल मामले की जांच जारी है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बगैर रसीद के किसने प्रमोद को टेबलेट और सीरप दिया था।
डॉक्टर के लिखे बगैर नहीं ले सकते एनआरएक्स दवा
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के अधीक्षक केके श्रीवास्तव ने बताया कि जब्त किया गया टेबलेट और सीरप एनआरएक्स दवा की श्रेणी में आता है। इन दवाओं को डॉक्टर अपने अधिकृत पर्चे पर लिखते हैं, तभी उसे मरीज को कोई मेडिकल स्टोर संचालक दे सकता है।
एनआरएक्स दवा को जितनी बार खरीदना होगा, उसके लिए उतनी ही बार डॉक्टर से मिल कर उनके अधिकृत पर्चे पर लिखवाना होगा। एनआरएक्स दवा को बेचने वाले मेडिकल स्टोर संचालक के पास लाइसेंस का होना भी अति आवश्यक है।