बलात्कार के आरोप में गुजरात की जेल में बंद नारायण सांई के वाराणसी के शिवपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने पर ग्रहण लग गया है। नारायण सांई की ओर से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फार्म छह भरकर आवेदन किया गया था। जांच में पता चला कि वह तीन साल से सूरत जेल में है। ऐसे में उनका नाम सूची में नहीं जोड़ा जा सकता। उनका आवेदन खारिज कर दिया गया है। डीएम-जिला निर्वाचन अधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने बताया कि चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक यूपी की किसी भी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार का नाम प्रदेश के किसी भी जिले की मतदाता सूची में होना आवश्यक है। इधर, नामांकन करने के लिए अब दो दिन ही शेष हैं। ऐसे में नारायण सांई के नामांकन करने और चुनाव लड़ने पर ग्रहण लग गया है।
बीते गुरुवार को नारायण सांई की ओर से उनके प्रतिनिधि धर्मेंद्र सिंह ने शिवपुर के रिटर्निंग आफिसर से नामांकन पत्र लिया था। धर्मेंद्र सिंह ने खुद के लिए भी शिवपुर से ही चुनाव लड़ने के लिए फॉर्म लिया है। दोनों को ओजस्वी पार्टी से चुनाव लड़ना था। इसी बीच शिवपुर के रिटर्निंग ऑफिसर सुशील कुमार गौड़ ने जांच के दौरान नारायण सांई का नाम जुड़वाने संबंधी आवेदन खारिज कर दिया। दरअसल साईं के लोगों ने उनका फर्जी निवास प्रमाणपत्र बनवा लिया था। मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इसी निवास प्रमाणपत्र को आधार बनाया गया था। जांच में यह गड़बड़ी सामने आई कि जब नारायण सांई तीन साल से जेल में बंद हैं तो उनका निवास प्रमाण पत्र कैसे बनाया गया। फर्जी तरीके से निवास प्रमाण मामले में एसडीएम पिंडरा अविनाश कुमार ने नायब तहसीलदार को जांच सौंपी है।