प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को बनारस के नरउर के प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के साथ जन्मदिन मनाने आ रहे हैं। गांव की टूटी कच्ची सड़क रातोंरात पक्की हो रही है। स्कूल के फर्श पर सेरामिक टाइल बिछ गई हैं। टूटी खिड़कियां संवर रही हैं। रंगाई-पुताई हो रही है। करीब हजार कर्मचारी गांव के एक हिस्से के कायाकल्प में जुटे हैं।
सरकारी काम भी इतनी तेजी से होता है, ग्रामीण यह देखकर रोमांचित हैं। हर हृदय आनंदित है। उनकी भाषा भी मुहावरेदार हो गई है। उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री बिना मांगे ही गांव को इतना दे जाएंगे कि झोली में नहीं समाएगा। विद्यालय में पांचवी का विद्यार्थी राहुल इस बात से खुश है कि स्कूल में केक कटेगा। वह छूटते ही कहता है- मोदी आएंगे और जन्मदिन मनाएंगे।
विद्यालय से ही लगते बाबा बाणासुर मंदिर के प्रांगण में बैठे कुछ बुजुर्ग हर काम को निहार रहे हैं। प्रधानमंत्री से आपकी क्या उम्मीदे हैं? इस सवाल के जवाब में छेदी सिंह कहते हैं- हमारे बड़े भाग्य हैं कि मोदी आ रहे हैं। गांव में बहुत काम हो रहे हैं। इतना देकर जाएंगे कि संभलेगा नहीं।
विद्यालय के कमरों और पुस्तकालयों में बच्चों के बनाए पोस्टर लगे हैं। ये बच्चों के सामाजिक बोध और राजनीतिक चेतना का प्रतीक हैं। एक पोस्टर पर लिखा है ‘से नो टू चाइनीज प्रोडक्ट’। कक्षा पांच के समर ने चतुर चूहा और बुद्धू बंदर बनाया है तो आर्यन ने छुई मुई की कथा उकेरी है। चौथी क्लास के शुभम कुमार ने अकेली मछली का हाल बताया है।